देहरादून: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून में प्रशिक्षणरत भारतीय वन सेवा (IFS) 2023 बैच के परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह आज वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के दीक्षांत गृह में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन, अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग रहे, जिन्होंने परिवीक्षार्थियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान कर सम्मानित किया।
इग्नफा के निदेशक डॉ. जगमोहन शर्मा ने अकादमी की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह संस्थान पूर्व में इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज के रूप में तथा अब राष्ट्रीय वन अकादमी के रूप में देश और 14 मित्र राष्ट्रों की सेवा कर रहा है। अब तक संस्थान से 367 वन अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 2023-25 सत्र में 109 भारतीय परिवीक्षार्थियों और भूटान के 2 विदेशी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनमें 22 महिला अधिकारी शामिल हैं।
इस बैच की विशेष बात यह रही कि यह 2023 में पाठ्यक्रम परिवर्तन के बाद पासआउट होने वाला पहला बैच है। साथ ही यह 21वीं सदी का अब तक का सबसे बड़ा बैच भी है।
50 अधिकारियों ने 75% से अधिक अंक अर्जित कर ऑनर्स डिप्लोमा प्राप्त किया। केरल संवर्ग के मिधुनमोहन एस.बी. बैच टॉपर रहे। समारोह में अन्य उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को भी पुरस्कृत किया गया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन ने अपने प्रेरणादायी दीक्षांत भाषण में अधिकारियों को बधाई देते हुए उन्हें नैतिकता, नियमों के पालन और व्यवहारिक अनुशासन के साथ कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नियमों से हटकर किया गया कोई भी कार्य तात्कालिक लाभ दे सकता है, लेकिन दीर्घकाल में यह नुकसानदायक हो सकता है। उन्होंने ‘सत्यम वद, धर्मं चर’ उद्धरण के माध्यम से सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि दीक्षांत समारोह में “Sense of Achievement” तो मिल सकता है, लेकिन पूरे सेवाकाल के समर्पण और ईमानदारी से कार्य करने पर ही “Sense of Fulfillment” प्राप्त होगा।
समारोह में उत्तराखंड के PCCF (HoFF), ICFRE के महानिदेशक, FRI निदेशक, भारतीय वन्यजीव संस्थान, IFS अधिकारीगण, आईएफएस सेवा के वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त अधिकारी, 2024 बैच के प्रशिक्षु, पासआउट अधिकारीगणों के परिजन एवं अन्य गणमान्य अतिथि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
