चंपावत: उत्तराखंड में मानसून की रफ्तार ने कुमाऊं अंचल में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हल्द्वानी-चोरगलिया मार्ग पर शेर नाला के उफान पर आने से सड़क के दोनों ओर घंटों तक वाहन फंसे रहे, वहीं कई लोग जान जोखिम में डालकर मटमैले, उफनते पानी को पार करते नज़र आए। दूसरी ओर टनकपुर में भारी जलभराव ने सड़कों को तालाब में तब्दील कर दिया, जिससे व्यापारियों और राहगीरों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
शेर नाला बना खतरे का रास्ता
रविवार को तेज बारिश के कारण शेर नाला उफान पर आ गया, जिससे हल्द्वानी-चोरगलिया मार्ग अवरुद्ध हो गया। पुलिस की तैनाती और चेतावनी बोर्ड के बावजूद कई लोग नाला पार करने की कोशिश करते रहे। एसपी सिटी प्रकाश चंद्र ने कहा कि पूर्व में इसी नाले में कई घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन लोग चेत नहीं रहे।
टनकपुर में जलजमाव से तबाही का मंजर
चंपावत जिले के टनकपुर में हालात और भी गंभीर दिखे। रोडवेज स्टेशन रोड, वार्ड नंबर 6 समेत कई इलाकों की सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया। दुकानों और घरों में पानी घुसने से व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। स्थानीय लोगों ने जल निकासी की ठोस व्यवस्था की मांग की है।
मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने देहरादून, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर समेत चार जिलों के लिए सोमवार और मंगलवार को भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में जलभराव की संभावना को देखते हुए सतर्कता बरतने की अपील की गई है। पर्वतों से मैदान तक फैलते इस बारिश के कहर ने एक बार फिर उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और जनसुरक्षा की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक टीमें अलर्ट पर हैं, लेकिन जनसहभागिता और सावधानी ही इस संकट की घड़ी में सबसे बड़ा हथियार बन सकती है।
