देहरादून: उत्तर भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से मिनिस्टर कॉन्फ्रेंस ऑन सिविल एविएशन (नॉर्दर्न रीजन) का आयोजन शुक्रवार को देहरादून-मसूरी रोड स्थित एक निजी होटल में किया गया। इस सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू की उपस्थिति में नागरिक उड्डयन के विविध पहलुओं और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में ‘राज्यों के लिए नागरिक उड्डयन में अवसर’ विषय पर आयोजित सत्र में विशेषज्ञों ने हवाई संपर्क, मानव संसाधन, ड्रोन नीति, हेलीकॉप्टर सेवाएं और हवाई अड्डों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुतिकरण दिया।
उड़ान योजना (UDAN) की प्रगति को साझा करते हुए मंत्रालय के संयुक्त सचिव असांगबा चुबा ने बताया कि योजना के तहत अब तक 625 आरसीएस रूट्स से देशभर में 1.53 करोड़ से अधिक यात्री लाभान्वित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगले 10 वर्षों में 4 करोड़ यात्रियों को कवर करने के लिए मॉडिफाइड उड़ान स्कीम लाई जाएगी, जिसमें 120 नए गंतव्य जोड़े जाएंगे।
संयुक्त सचिव मधु सूदन शंकर ने विमानन क्षेत्र के लिए जरूरी मानव संसाधन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत 2030 तक विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन जाएगा और 2040 तक देश में 45,000 से अधिक टेक्नीशियन की आवश्यकता होगी। इसके लिए राज्यों को अपने यहां प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने होंगे।
ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने बताया कि अब तक देश में 33,000 से अधिक ड्रोन पंजीकृत हो चुके हैं और 24,000 से अधिक ड्रोन पायलट प्रमाणित किए गए हैं। उन्होंने राज्यों से ड्रोन नीति लागू करने, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने और स्पेशल लॉन्चपैड बनाने की अपील की।
वहीं, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के निदेशक शंखेश मेहता ने प्रोजेक्ट संजीवनी के तहत हेलीकॉप्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवा (HEMS) की जानकारी दी। यह पहल एम्स ऋषिकेश और उत्तराखंड सरकार के सहयोग से शुरू की गई है, जिसके तहत अब तक 65 से अधिक सफल रेस्क्यू मिशन संचालित किए जा चुके हैं।
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक सुजॉय दे ने हवाई अड्डों के निर्माण में अपनाए जाने वाले तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों पर प्रकाश डाला, जबकि पवन हंस लिमिटेड के महाप्रबंधक पी.के. मरकन ने स्थायी हेलिपैड के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह न केवल आपदा प्रबंधन बल्कि नागरिक व सैन्य संचालन में भी अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं।
सम्मेलन में सामने आई प्रस्तुतियों और चर्चाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में नागर विमानन क्षेत्र एक समग्र विकास और तकनीकी क्रांति की ओर अग्रसर है, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
यह आयोजन न केवल संभावनाओं की पहचान का मंच बना, बल्कि विमानन के भविष्य की उड़ान के लिए सशक्त रणनीति का भी संकेतक साबित हुआ।
