देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई उत्तराखंड कैंपा शासी निकाय की बैठक में राज्य के वनों, जल स्रोतों और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में कैंपा फंड के तहत संचालित योजनाओं की गहन समीक्षा की गई और इसे वन संरक्षण से लेकर ग्रामीण आजीविका तक के लिए प्रभावी रूप से उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैंपा निधि का इस्तेमाल केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके जरिए वन क्षेत्रों में जल स्रोतों का संरक्षण, वनाग्नि रोकथाम, और स्थानीय समुदायों के कल्याण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने देहरादून शहर में ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए केंद्र से अनुमति लेने की प्रक्रिया तेज करने को भी कहा।
हरेला पर्व पर विशेष वृक्षारोपण अभियान
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आगामी हरेला पर्व पर फलदार और औषधीय पौधों का वृहद स्तर पर पौधारोपण किया जाए। इस अभियान में जन भागीदारी को अनिवार्य बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि लोग “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से जुड़ें। इसके साथ ही गौरा देवी की जन्म शताब्दी के अवसर पर सभी वन प्रभागों में फलदार पौधे लगाने के निर्देश भी दिए गए।
जल स्रोत संरक्षण को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने वन विभाग, पेयजल, जलागम, ग्राम्य विकास और कृषि विभागों को मिलकर जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए संयुक्त कार्ययोजना बनाने को कहा। वन क्षेत्रों में जल स्रोत संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए गए।
वनाग्नि रोकथाम के लिए सामुदायिक और तकनीकी रणनीति
वनाग्नि जैसी आपदाओं से बचाव के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय सहभागिता के साथ एक व्यापक रणनीति तैयार करने के भी निर्देश दिए गए।
वन आधारित स्वरोजगार को मिलेगा बढ़ावा
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि स्थानीय लोगों को वन संरक्षण से जोड़ने के लिए स्वरोजगार और आजीविका आधारित योजनाएं चलाई जाएंगी, ताकि वनों के सतत उपयोग और संरक्षण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
गुणवत्ता और समयबद्धता की होगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कैंपा फंड से संचालित सभी योजनाओं की नियमित समीक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और समय पर निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक में विधायक भूपाल राम टम्टा, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक समीर सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। धामी सरकार ने कैंपा निधि को केवल एक वित्तीय संसाधन नहीं, बल्कि “हरित उत्तराखंड और समृद्ध ग्राम्य जीवन” की दिशा में एक रणनीतिक उपकरण बनाने का संकेत दे दिया है।