इकोलॉजी और इकोनॉमी” के संतुलन से तय होगा उत्तराखंड का विकास मॉडल: CM धामी ने दिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड को समग्र, सतत और संतुलित विकास की दिशा में ले जाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। यह बैठक आगामी 24 जून को वाराणसी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद (CZC) की 25वीं बैठक की तैयारियों के सिलसिले में बुलाई गई थी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश से जुड़े विषयों पर “इकोलॉजी और इकोनॉमी के समन्वय” की भावना से ठोस, व्यावहारिक और नवाचार आधारित प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि दोनों का संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है।

बच्चों के पोषण और विकास पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों का भविष्य ही राज्य और देश का भविष्य है। इसलिए उनके पोषण, मानसिक और शारीरिक विकास पर एकीकृत, लक्ष्य आधारित योजना बनाई जाए। उन्होंने ICDS, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और खेल विभागों को आपसी तालमेल से काम करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों को संपूर्ण विकास का अवसर मिल सके।

आयुष्मान योजना का 100% पंजीकरण और 112 हेल्पलाइन को लेकर निर्देश

मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पंजीकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के हर नागरिक तक इस योजना का लाभ पहुँचना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही, आपातकालीन सेवा 112 हेल्पलाइन के प्रचार-प्रसार को तेज करने के निर्देश भी दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर आम नागरिक तुरंत मदद प्राप्त कर सकें।

महिला एवं बाल विकास विभाग को कुपोषण और एनीमिया पर केंद्रित करने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग को कुपोषण और एनीमिया के मामलों की नियमित समीक्षा कर सुधार हेतु अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने ज़िला स्तर पर इन प्रयासों की निगरानी और मूल्यांकन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया।

प्रस्तावों में दिखे उत्तराखंड की ज़रूरतें और संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वाराणसी में होने वाली बैठक में उत्तराखंड की ज़रूरतों, चुनौतियों और संभावनाओं के अनुरूप ठोस प्रस्ताव सामने रखे जाएं, जो प्रदेश की भावी विकास योजनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकें।

 

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