चमोली : उत्तराखंड की हिमालयी वादियों में इन दिनों प्रकृति ने रंगों की चादर ओढ़ ली है, और इसकी सबसे खूबसूरत झलक दिखा रहे हैं वे पंखों वाले मेहमान—प्रवासी पक्षी, जिन्होंने नंदा देवी और केदारनाथ बायोस्फीयर रिज़र्व के वन क्षेत्रों को अपना अस्थायी घर बना लिया है।
इन बायोस्फीयर रिज़र्व के जोशीमठ बफर ज़ोन के सुनील, मनौटी, परसारी, औली, और केदारनाथ क्षेत्र के मंडल, चोपता, रुद्रनाथ, अनसूया जैसे जैविक विविधता से भरपूर क्षेत्रों में पक्षियों की 105 से अधिक प्रजातियां इन दिनों कलरव कर रही हैं।
स्वर्ग के पक्षी, धरती पर दीदार
इन वनों में बर्ड वॉचर्स को देखने को मिल रही हैं –
1. इंडियन पैराडाइज़ फ्लाईकैचर (जिसे स्थानीय रूप से दूध राज कहा जाता है),
2. ब्लू-कैप्ड रॉक थ्रश,
3. कॉमन कुकू,
4.एशियन कोयल,
5. टिकलर थ्रश,
6. वर्डिटर फ्लाईकैचर और
7.सिमिटर बैब्लर जैसी अनेक दुर्लभ प्रजातियां।
बर्ड टूरिज्म को नई उड़ान
पक्षी-प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह इलाका जीवंत लेबोरेटरी बन चुका है। पर्यटन विभाग भी इस असाधारण बर्ड एक्टिविटी से उत्साहित है क्योंकि बर्ड वॉचिंग के लिए आने वाले पर्यटकों की संख्या में इज़ाफा देखा जा रहा है।
नेस्टिंग सीजन बना आकर्षण का केंद्र
पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि ये प्रवासी पक्षी मई से सितंबर के बीच हिमालयी इलाकों में नेस्टिंग और प्रजनन करते हैं, और फिर वापस निचले क्षेत्रों में लौट जाते हैं।
युवा पीढ़ी में जागे संरक्षण की चेतना
स्थानीय समुदायों और युवाओं को पक्षियों की विविधता के बारे में जानने और उनके संरक्षण के लिए जागरूक करने पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। यह जैविक खजाना केवल देखने भर की चीज नहीं, बल्कि संवेदनशील संरक्षण की पुकार भी है।
उत्तराखंड के जंगलों में गूंजती पक्षियों की चहचहाहट, अब न केवल पर्यटकों को बुला रही है बल्कि प्रकृति और पारिस्थितिकी के संतुलन की भी याद दिला रही है।
तो आइए! इस गर्मी की छुट्टियों में अपने कैमरे और बाइनोकुलर के साथ प्रकृति की इस संगीत सभा में शामिल हों!
