देहरादून : उत्तराखंड को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब न्याय की घड़ी करीब आ गई है। कोटद्वार की विशेष न्यायालय कल यानी 30 मई को इस बहुचर्चित केस पर अपना फैसला सुनाने जा रही है।
22 वर्षीय अंकिता भंडारी, पौड़ी जनपद के यमकेश्वर ब्लॉक निवासी थी और यहीं स्थित वनतारा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर कार्यरत थी। लेकिन 18 सितंबर 2022 को उसकी रहस्यमय गुमशुदगी ने एक खौफनाक कहानी को जन्म दिया, जिसका खुलासा 28 सितंबर को उसकी हत्या की पुष्टि के साथ हुआ।
रिज़ॉर्ट की दीवारों के पीछे छिपी थी क्रूरता की कहानी
जांच में खुलासा हुआ कि अंकिता के साथ रिज़ॉर्ट में मानव गरिमा को शर्मसार करने वाला व्यवहार किया गया, जिसका विरोध करना उसे जीवन से हाथ धोने की कीमत चुकाने जैसा साबित हुआ। इस निर्मम हत्या ने राज्यभर में जनाक्रोश की लहर पैदा कर दी थी और मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बन गया।
कोर्ट का फैसला, जनता की उम्मीदें
मामला लंबे समय तक अदालत में विचाराधीन रहा और सुनवाई की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। अब पूरे प्रदेश की निगाहें कोटद्वार कोर्ट के कल आने वाले ऐतिहासिक निर्णय पर टिकी हुई हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम, कोर्ट परिसर छावनी में तब्दील
संवेदनशीलता को देखते हुए कोटद्वार न्यायालय परिसर को कड़ी सुरक्षा के घेरे में ले लिया गया है। भारी पुलिस बल, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती के साथ बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
क्या मिलेगा अंकिता को इंसाफ?
न्याय की आस में बैठा हर उत्तराखंडी आज यही सवाल पूछ रहा है। यह फैसला केवल एक हत्या का न्याय नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए समाज का संकल्प भी साबित होगा।
अंकिता भंडारी की हत्या की गूंज आज भी उत्तराखंड के लोगों के दिलों में है। कोर्ट का फैसला न्याय की दिशा में एक निर्णायक मोड़ होगा, जो यह तय करेगा कि क्या सच में कानून की नजर में सभी बराबर हैं और क्या हर बेटी को इंसाफ मिल सकता है?
