उत्तराखंड की दालचीनी को मिलेगा वैश्विक मंच, 20 हजार से अधिक किसानों की आय बढ़ाने की तैयारी

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड को सुगंधित फसलों की खेती का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में दालचीनी के प्रवर्धन, सतत खेती और कटाई उपरांत तकनीकों पर आधारित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने किया।

अपने संबोधन में कृषि मंत्री ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन से उत्तराखंड की दालचीनी को वैश्विक पहचान मिलने के साथ किसानों को आधुनिक तकनीकों और बेहतर बाजार की जानकारी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की महक क्रांति नीति के तहत दालचीनी सहित सुगंधित फसलों की खेती को वैज्ञानिक ढंग से बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी।

कार्यशाला में श्रीलंका, इंडोनेशिया और भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, एरोमा उद्योग से जुड़े उद्यमी तथा राज्य के किसान शामिल हुए। विशेषज्ञों ने दालचीनी की उन्नत खेती, नर्सरी प्रबंधन, उत्पादन बढ़ाने की तकनीक और अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी।

कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के सचिव डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडे ने बताया कि महक क्रांति नीति के तहत दालचीनी और अन्य सुगंधित फसलों के विस्तार के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। राज्य सरकार ने सुगंधित कृषि क्षेत्र का वार्षिक कारोबार 1180 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान ने बताया कि उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026-36 के अंतर्गत नैनीताल और चम्पावत जिलों में 5200 हेक्टेयर क्षेत्र में दालचीनी की खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से लगभग 20,800 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।

कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की। सुगंध एवं फ्लेवर उद्योग से जुड़े संगठनों के पदाधिकारियों ने काशीपुर में विकसित हो रहे एरोमा पार्क की प्रगति की जानकारी देते हुए इस क्षेत्र में निवेश और प्रोत्साहन योजनाओं को और मजबूत बनाने का सुझाव दिया।

तकनीकी सत्र में श्रीलंका और इंडोनेशिया से आए विशेषज्ञों ने अपने देशों में दालचीनी उत्पादन की सफल तकनीकों और वैश्विक बाजार की मांग पर प्रकाश डाला। वहीं अंडमान एवं निकोबार से आए कृषि वैज्ञानिकों ने उन्नत कृषि पद्धतियों और बेहतर उत्पादन तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए।

सेमिनार के दौरान प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें श्रीलंका, इंडोनेशिया और भारत के विभिन्न राज्यों में तैयार किए जा रहे दालचीनी आधारित उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। आयोजन में कृषि, उद्यान, रेशम, बायोटेक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दालचीनी और अन्य सुगंधित फसलों के लिए तैयार की गई योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख एरोमा और मसाला उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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