देहरादून: उत्तराखंड में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने के लिए सरकार ने आजीविका योजनाओं की निगरानी को और कड़ा कर दिया है। मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे आजीविका से जुड़ी योजनाओं की आउटपुट मॉनिटरिंग को प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि इनसे महिलाओं की आय में वास्तविक बढ़ोतरी हो रही है या नहीं। इसके लिए जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा, 100 से अधिक योजनाओं को मंजूरी
मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम (MBADP) और मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना (MPRY) के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 100 से अधिक योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें मुख्य रूप से—
पैकेजिंग मशीन यूनिट स्थापना
हैंडलूम प्रशिक्षण
मिनी स्पाइस मिल
कीवी और मशरूम क्लस्टर विकास
पौध नर्सरी निर्माण व पुष्प उत्पादन
स्थानीय उत्पादों के विकास व डेयरी यूनिट स्थापना
इन योजनाओं का फायदा महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित हो सकेगी।
राज्यभर में रोजगार बढ़ाने की रणनीति
उधमसिंह नगर: 12 योजनाएं
उत्तरकाशी: 14 योजनाएं
चमोली: 12 योजनाएं
चंपावत: 24 योजनाएं
पिथौरागढ़: 21 योजनाएं
मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत भी विभिन्न जिलों में 100 से अधिक नई योजनाओं को मंजूरी दी गई है।
‘हाउस ऑफ हिमालया’ से जुड़ेंगे स्थानीय उत्पाद
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को उत्तराखंड के प्रतिष्ठित अम्ब्रेला ब्रांड ‘हाउस ऑफ हिमालया’ से जोड़ा जाए, जिससे उनके उत्पादों को एक बड़ा बाजार मिल सके और वे राज्य के भीतर और बाहर बेचे जा सकें।
इस अहम बैठक में सचिव राधिका झा, चंद्रेश कुमार, उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस. एस. नेगी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।