रुद्रप्रयाग: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में चल रही तीर्थयात्रा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को अभेद बनाने के लिए सख्त और बहुस्तरीय इंतजाम लागू कर दिए हैं। पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर के नेतृत्व में यात्रा मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक हर स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
संवेदनशील स्थानों पर बम निरोधक दस्ता (BDS) और पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा सघन एंटी-सबोटाज चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। मंदिर के प्रवेश द्वार, प्रतीक्षा स्थल और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में आधुनिक मेटल डिटेक्टर के जरिए हर श्रद्धालु और उनके सामान की गहन जांच की जा रही है।
तकनीक के मोर्चे पर भी सुरक्षा मजबूत की गई है। सीसीटीवी कैमरों के विस्तृत नेटवर्क से 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है, वहीं ड्रोन के जरिए ऊंचाई वाले और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखना है, साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है।
पुलिस ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे जांच प्रक्रिया में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस को दें।
सतर्कता ने बचाई मासूम की जिंदगी
इसी बीच यात्रा के दौरान मानवीय संवेदनशीलता का एक बड़ा उदाहरण भी सामने आया। वाराणसी से आए एक श्रद्धालु की 10 माह की बच्ची अचानक बीमार हो गई। बच्ची को कंडी में नीचे लाया जा रहा था, जबकि परिजन आगे निकल चुके थे। खराब मौसम, ठंड और ऊंचाई के कारण बच्ची की हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
भैरव ग्लेशियर के पास तैनात टीम और सतर्क यात्रियों ने तुरंत स्थिति को भांप लिया और बिना देर किए बच्ची को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। जांच में पता चला कि बच्ची हाइपोथर्मिया, ऑक्सीजन की कमी और भूख से जूझ रही थी—जो जानलेवा साबित हो सकती थी।
डॉ. नरेश और उनकी टीम ने तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट, इलाज और फीडिंग देकर बच्ची की जान बचा ली। बाद में प्रशासन ने परिजनों को बुलाकर बच्ची को सुरक्षित सौंप दिया और भविष्य में सावधानी बरतने की सख्त हिदायत दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामप्रकाश ने इसे गंभीर चेतावनी बताते हुए कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों का मौसम बेहद कठोर और अनिश्चित होता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से सलाह दी कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को ऐसी यात्राओं में लाने से बचना चाहिए।
