‘रसोई से रायसीना हिल तक बेटियों का सफर’—नारी शक्ति पर बोले सीएम धामी, सदन में गरमाई सियासत

 

 

 

देहरादून: विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री धामी ने नारी सशक्तिकरण को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का ही परिणाम है कि आज सामान्य परिवारों की बेटियां “रसोई से रायसीना हिल” तक पहुंच रही हैं।

मुख्यमंत्री ने द्रौपदी मुर्मु, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाएं अब हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि नारी वंदन केवल विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य परिवर्तन है, जो लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाएगा।

“कौरवों की सभा की याद दिलाने वाला दृश्य”

मुख्यमंत्री धामी ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित न होने पर विपक्ष की प्रतिक्रिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब विधेयक संख्या बल के कारण पारित नहीं हो पाया, तब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेताओं का ताली बजाना उन्हें महाभारत की उस सभा की याद दिलाता है, जहां द्रौपदी का अपमान हुआ था।

कांग्रेस सरकारों पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी सीमित रही। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि इंदिरा गांधी का प्रधानमंत्री बनना पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा।

“चांदी की चम्मच वाले दर्द नहीं समझते”

सीएम धामी ने स्वच्छ भारत मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ, जो जमीनी स्तर पर बड़ा बदलाव है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि “चांदी की चम्मच लेकर पैदा होने वाले लोग” आम जनता की समस्याओं को नहीं समझ सकते।

सदन में हंगामा और नारेबाजी

सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि 2023 में पारित अधिनियम को जानबूझकर लागू नहीं किया जा रहा है।

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा के बयान पर कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और अध्यक्ष पीठ के सामने नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष की मांग थी कि मंत्री अपना वक्तव्य वापस लें, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में हंगामे के बीच निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।

एक नजर में सत्र

  • कुल अवधि: 6.03 घंटे
  • 26 विधायकों (मुख्यमंत्री सहित) ने लिया भाग
  • 18 भाजपा, 6 कांग्रेस, 1 बसपा और 1 निर्दलीय विधायक शामिल
  • सत्तापक्ष की 5 महिला विधायकों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया

इस पूरे सत्र के दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस और राजनीतिक टकराव साफ नजर आया।

(Visited 755 times, 1 visits today)