गोपेश्वर (चमोली): हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू होने से पहले पैदल मार्ग खोलने की कोशिशें तेज हैं, लेकिन लगातार हो रही बर्फबारी इसमें बड़ी बाधा बन रही है। खराब मौसम के कारण सेना को कई बार बर्फ हटाने का काम बीच में ही रोकना पड़ रहा है।
इसके बावजूद सेना और गुरुद्वारा के सेवादारों की टीम ने हिम्मत नहीं हारी। कड़ी मशक्कत के बाद टीम अटलाकोटी हिमखंड को पार करते हुए हेमकुंड से करीब दो किलोमीटर नीचे पुरानी सीढ़ियों तक पहुंचने में सफल रही है।
समुद्रतल से करीब 15,225 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने प्रस्तावित हैं। यात्रा से पहले रास्ता सुगम बनाना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मार्ग से बर्फ हटाने के कार्य में सेना के 22 जवान और गुरुद्वारा के 22 सेवादार लगातार जुटे हुए हैं। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सीईओ सेवा सिंह ने बताया कि फिलहाल टीम बेस कैंप घांघरिया में रहकर काम कर रही है।
मौसम के बार-बार बदलते मिजाज के चलते अब रणनीति में बदलाव किया गया है। टीम हेमकुंड से नीचे की ओर रास्ता साफ करने पर फोकस कर रही है, ताकि धीरे-धीरे पूरा मार्ग खोला जा सके। हालांकि, लगातार बर्फबारी के कारण काम की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
वर्तमान में हेमकुंड साहिब क्षेत्र में सात फीट से अधिक बर्फ जमी हुई है। वहीं अटलाकोटी से हेमकुंड तक करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र पूरी तरह बर्फ की मोटी चादर से ढका है, जिससे पैदल मार्ग का पता लगाना भी मुश्किल हो गया है।
एक जून से खुलेगी फूलों की घाटी
चमोली जिले में स्थित विश्व धरोहर फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान को भी एक जून से पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी है। हालांकि, अभी तक घाटी तक जाने वाले मार्ग को दुरुस्त करने का काम शुरू नहीं हो पाया है।
बेस कैंप घांघरिया से घाटी तक तीन किलोमीटर क्षेत्र में कई स्थानों पर भारी हिमखंड जमा हैं, जिनमें बामणधौड़ समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे में यात्रा शुरू होने से पहले रास्ता खोलना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
