देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि संसद में इस मुद्दे पर की गई वोटिंग देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं को उनका अधिकार देने में बाधा डालकर अपनी “महिला विरोधी सोच” उजागर की है।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने का स्पष्ट संकल्प लिया गया है। इसी दिशा में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” लाया गया, लेकिन कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इसका विरोध कर ऐतिहासिक अवसर गवा दिया।
उन्होंने कहा कि संसद में हुई हालिया चर्चा सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णायक क्षण था। इसके बावजूद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता देते हुए इसका विरोध किया।
सीएम धामी ने यह भी कहा कि प्रस्तावित 131वां संविधान संशोधन विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को 2029 के आम चुनावों से आरक्षण का लाभ दिलाना था, लेकिन तकनीकी आपत्तियों के नाम पर इसे रोका गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन को लेकर फैलाई जा रही आशंकाएं तथ्यहीन हैं और इससे किसी राज्य के हित प्रभावित नहीं होंगे।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि महिला अधिकारों के सवाल पर कांग्रेस का रिकॉर्ड पहले भी निराशाजनक रहा है—चाहे वह शाह बानो केस हो या तीन तलाक जैसे मुद्दे।
सीएम ने कहा कि “महिलाओं को अधिकार देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है।” उन्होंने भरोसा जताया कि मातृशक्ति के सहयोग से यह दशक उत्तराखंड के विकास का दशक बनेगा और भाजपा महिलाओं के सशक्तिकरण के अपने संकल्प को पूरा करेगी।
उन्होंने सभी दलों से अपील की कि इस विषय को राजनीति से ऊपर उठकर देशहित और सामाजिक न्याय के नजरिए से देखें। साथ ही दोहराया कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ही मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है।