NEET आंदोलन में बढ़ी राजनीति, छात्रों के मुद्दे पर श्रेय की जंग तेज

 

 

 

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में चल रहे NEET से जुड़े आंदोलन ने अब राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ने के बाद आंदोलन का फोकस छात्रों की मांगों से हटकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप की ओर जाता दिखाई दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी छात्र आंदोलन में राजनीतिक दल खुलकर शामिल होने लगते हैं, तो आम जनता के बीच उसके मूल उद्देश्य की धारणा प्रभावित हो सकती है। छात्रों के मुद्दों के बजाय राजनीतिक संदेश अधिक प्रमुख हो जाते हैं।

इस बीच सत्ता पक्ष के सहयोगी दलों के भीतर भी यह चर्चा है कि यदि शुरुआती दौर में सरकार की ओर से संवाद की पहल की जाती, तो आंदोलन इतना व्यापक रूप नहीं लेता। सोशल मीडिया पर भी आंदोलन को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया, जिससे कई तरह की सूचनाएं और दावे तेजी से वायरल हुए।

मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को वार्ता के लिए भेजा गया। साथ ही संसद में NEET पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए भी सहमति जताई गई।

विश्लेषकों का कहना है कि आंदोलन में राजनीतिक दलों की बढ़ती मौजूदगी से इसे सरकार और विपक्ष के बीच की राजनीतिक लड़ाई के रूप में देखा जाने लगता है, जिससे आम लोगों की भागीदारी और समर्थन प्रभावित हो सकता है।

आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में विभिन्न राजनीतिक दलों की सक्रियता को चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं, छात्रों की प्रमुख मांगों पर समाधान और संवाद को लेकर अब भी सभी की निगाहें सरकार और आंदोलनकारी संगठनों पर टिकी हैं।

 
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