TMP : तमिलनाडु की राजनीति में इस समय बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। थलपति विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन अब तक सरकार बनाने का न्योता नहीं मिलने पर विपक्षी दल खुलकर उनके समर्थन में उतर आए हैं।
एमके स्टालिन की पार्टी DMK सहित कई दलों ने राज्यपाल से मांग की है कि विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाए। इस मुद्दे पर तमिलनाडु में लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है।
राजभवन की ओर से जारी बयान के अनुसार, राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने विजय से मुलाकात कर स्पष्ट किया कि सरकार बनाने के लिए विधानसभा में बहुमत समर्थन जरूरी है।
हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते TVK को पहले मौका मिलना चाहिए। कमल हासन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि विजय की पार्टी को सरकार बनाने का निमंत्रण न देना जनता के जनादेश का अपमान है। उन्होंने एसआर बोम्मई मामला का हवाला देते हुए कहा कि बहुमत का परीक्षण सदन में होना चाहिए, न कि राजभवन में।
वहीं थोल तिरुमावलवन और CPI नेताओं ने भी विजय को बहुमत साबित करने का अवसर देने की मांग की है।
क्या है संख्या का गणित?
तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 सीटों का है। TVK ने 108 सीटें जीती हैं। विजय द्वारा एक सीट छोड़ने के बाद पार्टी के पास 107 विधायक रह जाएंगे। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद यह संख्या 112 तक पहुंचती है, जो बहुमत से अभी भी छह कम है।
क्या कहता है संवैधानिक नियम?
संवैधानिक परंपरा के अनुसार, यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो राज्यपाल उस नेता को सरकार बनाने का न्योता दे सकते हैं जो सदन में बहुमत साबित करने की स्थिति में हो। ऐसे मामलों में फ्लोर टेस्ट को अंतिम कसौटी माना जाता है।
तमिलनाडु में चुनाव परिणामों के बाद अब राजनीतिक लड़ाई सत्ता से ज्यादा संवैधानिक परंपराओं और जनादेश की व्याख्या को लेकर होती दिख रही है। सभी की नजरें अब राज्यपाल के अगले कदम और संभावित फ्लोर टेस्ट पर टिकी हैं।
