देहरादून : महिलाओं में होने वाली एक आम हार्मोनल समस्या को अब केवल अंडाशय या प्रजनन स्वास्थ्य से जोड़कर देखने के बजाय उसके हार्मोनल और मेटाबॉलिक प्रभावों पर भी फोकस किया जा रहा है। इसी बदलाव के बीच देहरादून में करीब 500 मेडिकल और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को PCOS के नए नाम और इसके व्यापक प्रभावों को लेकर जागरूक किया गया।
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज और PCOS सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बीमारी की पहचान, जोखिम कारकों और प्रबंधन के आधुनिक दृष्टिकोण की जानकारी दी।
क्यों बदला गया PCOS का नाम?
जून 2026 में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एम्ब्रियोलॉजी (ESHRE) ने Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome (PMOS) नाम को नए नाम के रूप में स्वीकार किए जाने का स्वागत किया। ESHRE के मुताबिक “polycystic” शब्द बीमारी की पूरी प्रकृति को नहीं दर्शाता, क्योंकि इसका प्रभाव केवल अंडाशय तक सीमित नहीं है। नई शब्दावली इसके एंडोक्राइन और मेटाबॉलिक पहलुओं को अधिक स्पष्ट करती है।
ESHRE ने तीन साल के संक्रमण काल की बात कही है, इसलिए फिलहाल PCOS और PMOS दोनों नामों का इस्तेमाल देखने को मिलेगा।
बीपी, ब्लड शुगर और वजन से भी जुड़ा विषय
कार्यक्रम की स्थानीय कन्वीनर और वरिष्ठ आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. आकृति गुप्ता ने कहा कि इस स्थिति को केवल महिलाओं के अंडाशय से जुड़ी समस्या मानना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ जीवनशैली, पोषण, वजन, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जैसे पहलुओं को भी समझना जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि, चिकित्सकीय सलाह और समय पर पहचान के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने किशोरावस्था से ही लड़कियों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत पर भी जोर दिया।
विशेषज्ञों ने अलग-अलग पहलुओं पर की चर्चा
कार्यक्रम में डॉ. रेखा श्रीवास्तव ने बीमारी के चिकित्सकीय और वैज्ञानिक पहलुओं पर जानकारी दी। प्राचार्य डॉ. उत्कर्ष शर्मा ने कहा कि मेडिकल विद्यार्थियों के लिए बीमारी के उपचार के साथ उसके सामाजिक, मानसिक और मेटाबॉलिक पहलुओं को समझना भी जरूरी है।
पैनल चर्चा में एंडोक्राइनोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन, रेडियोलॉजी, डायटेटिक्स और न्यूट्रिशन समेत विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने हार्मोनल बदलाव, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से जुड़े पहलुओं पर विद्यार्थियों के साथ चर्चा की।
