वंदे मातरम’ की गूंज के साथ भारत के बेटे ने भरी अंतरिक्ष उड़ान – शुभांशु शुक्ला ने रचा इतिहास!

 

 

 

TMP: भारत के लिए यह एक गौरवशाली और भावनात्मक क्षण है – भारतीय वायुसेना के जांबाज़ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने बुधवार को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के ज़रिए Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर उड़ान भरी।

लेकिन इस ऐतिहासिक उड़ान को और भी देशभक्ति से ओत-प्रोत बना दिया शुभांशु के उस खास पल ने, जब वे लॉन्च पैड की ओर बढ़ते हुए अपने कानों में गूंजता हुआ गाना सुन रहे थे – ‘वंदे मातरम’

यह वही ‘वंदे मातरम’ है जिसे साल 2024 में रिलीज़ हुई ऋतिक रोशन की फिल्म ‘फाइटर’ में एंथम सॉन्ग के रूप में इस्तेमाल किया गया था। यह फिल्म भारतीय वायुसेना के शौर्य पर आधारित थी — और शुभांशु खुद भी उसी फाइटर पायलट समुदाय का हिस्सा हैं।

NASA की परंपरा, भारत की भावना

शुभांशु ने यह गाना नासा की परंपरा के अनुसार चुना, जिसमें एस्ट्रोनॉट्स लॉन्च से पहले अपनी पसंद का गाना सुनते हैं ताकि वे भावनात्मक रूप से मजबूत रहें और मिशन के लिए जोश से भर सकें।

शुभांशु के चुने हुए इस गीत के बोल हैं:

“भारत कोई स्वप्न नहीं, बल्कि जश्न है… जीत हर भारतीय की रगों में बहने वाली आदत है…”

और इस गाने ने एक बार फिर साबित किया — अंतरिक्ष में भी दिल हिंदुस्तानी ही धड़कता है।

भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने शुभांशु

शुभांशु शुक्ला, राकेश शर्मा के बाद भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। 1984 के बाद यह पहला अवसर है जब भारत का कोई नागरिक मानव मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा कर रहा है।

कौन हैं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला?

  • मूल रूप से लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निवासी।

  • नेशनल डिफेंस एकेडमी के पूर्व छात्र।

  • 2006 में भारतीय वायुसेना से जुड़े।

  • 2000+ घंटे की उड़ान का अनुभव।

  • Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar, Hawk, Dornier और An-32 जैसे लड़ाकू विमानों के अनुभवी पायलट।

  • भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए चुने गए चार पायलटों में से एक — और सबसे युवा।

Axiom-4 मिशन में और कौन हैं शामिल?

  • Peggy Whitson (USA) – मिशन कमांडर

  • Tibor Kapu (हंगरी)

  • Slawosz Uznanski (पोलैंड)

ये सभी मिलकर ISS पर विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयोगों को अंजाम देंगे।

‘वंदे मातरम’ की गूंज, अंतरिक्ष की ऊँचाइयों और भारत की आत्मा का संगम बन गई। शुभांशु शुक्ला की ये यात्रा हर भारतीय के लिए प्रेरणा है कि जहाँ तक दृष्टि जाती है, वहाँ तक भारत का सपना भी पहुंच सकता है।

 
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