धामी का अल्टीमेटम: 15 अक्टूबर तक पूरी हों विकास परियोजनाएं, देरी पर होगी सख्त कार्रवाई

 

 

 

 

देहरादून: उत्तराखंड में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि परियोजनाओं में लापरवाही और देरी अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने करीब 6940 करोड़ रुपये की 12 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए समयबद्ध कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परियोजनाओं का आधे से अधिक कार्य पूरा हो चुका है, उन्हें 15 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्तर पर अनावश्यक देरी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में परिवहन, ऊर्जा, लोक निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्ग और सीमा सड़क संगठन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तराखंड की भूमिका महत्वपूर्ण है और इसके लिए सभी विभागों को मिशन मोड में कार्य करना होगा।

धामी ने परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री स्तर पर मासिक तथा मुख्य सचिव स्तर पर प्रत्येक दस दिन में समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रगति पोर्टल को केवल रिपोर्टिंग का माध्यम न मानकर एक मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में उपयोग किया जाए, ताकि हर बाधा का समय रहते समाधान हो सके।

समीक्षा के दौरान रामनगर आईएसबीटी, रानीखेत बस टर्मिनल, ताड़ीखेत डिपो एवं कार्यशाला, बनबसा और रुद्रप्रयाग विद्युत उपकेंद्र, चारधाम सड़क परियोजना, अस्कोट-लिपुलेख मार्ग, माणा पास सड़क और हरिद्वार-काशीपुर क्षेत्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण, वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों, वन भूमि हस्तांतरण और क्षतिपूर्ति भुगतान से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को भी जनपद स्तर पर लंबित प्रकरणों की व्यक्तिगत निगरानी कर तेजी से समाधान निकालने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा, सीमांत क्षेत्रों की रणनीतिक सड़कें, बिजली अवसंरचना और परिवहन सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं प्रदेश के विकास की धुरी हैं। इनके समय पर पूरा होने से पर्यटन, निवेश, व्यापार और रोजगार को नई गति मिलेगी तथा राज्य की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक परियोजना के लिए स्पष्ट उत्तरदायित्व तय किया जाए और जिन योजनाओं की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, उनके लिए विशेष कार्ययोजना बनाकर तेजी से परिणाम सुनिश्चित किए जाएं।

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