देहरादून: उत्तराखंड में रोजगार की तस्वीर केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। कोई औषधीय खेती से सैकड़ों लोगों को जोड़ रहा है, कोई स्थानीय उत्पादों को कारोबार में बदल रहा है, तो कोई भाषा प्रशिक्षण के बाद विदेश में अपनी जगह बना रहा है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए ऐसे ही लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने अपने अनुभव साझा किए।
शनिवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘विकसित उत्तराखण्ड–यात्रा जारी है’ संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उद्यमियों, किसानों, नवाचारकर्ताओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास को गति देने में स्थानीय प्रतिभा, नए विचार और रोजगार पैदा करने वाले प्रयासों की अहम भूमिका है।
पांच साल में दोगुने से भी ज्यादा हुए स्टार्टअप
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में स्टार्टअप की संख्या पिछले पांच वर्षों में करीब 700 से बढ़कर 1,700 से अधिक हो गई है। उनके अनुसार, युवा कृषि, तकनीक और उद्योग जैसे क्षेत्रों में नए प्रयोग कर रहे हैं और रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाले भी बन रहे हैं।
धामी ने कहा कि पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और स्वरोजगार में प्रदेश के पास आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप उत्तराखंड को आगे ले जाने में सरकार के प्रयासों के साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
बद्री गाय, गुच्छी मशरूम और औषधीय खेती से बनी पहचान
संवाद में उत्तरकाशी के जयप्रकाश ने बताया कि उन्होंने एक गाय से डेयरी कारोबार शुरू किया था। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने इसे आगे बढ़ाया और अब उनके पास पांच बद्री गाय व आठ देशी गाय हैं।
पौड़ी के नवीन पटवाल गुच्छी मशरूम के व्यावसायिक उत्पादन से जुड़े हैं। चमोली के डॉ. हरपाल नेगी ने घेस क्षेत्र में कुटकी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती को प्रोत्साहित करने की जानकारी दी। उनके मुताबिक, 300 से अधिक लोग इस काम से जुड़े हैं और सामूहिक वार्षिक आय करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक पहुंचती है।
चमोली के राजेश ने गांव लौटकर रोजमेरी और अन्य हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में काम शुरू किया है। उनके प्रयास स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बना रहे हैं।
10 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाला स्टार्टअप
ऊधमसिंह नगर के विकास कुमार शाह ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ स्टार्टअप चला रहे हैं, जिसका टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। वहीं, चंपावत के राहुल नरियाल ने सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली कार तैयार करने के अपने प्रयासों के बारे में जानकारी दी।
नैनीताल की कमला देवी ने वाहनों के टायरों की मरम्मत के काम से आय अर्जित करने का अनुभव साझा किया। सोमेश्वर के ललित खाती ने एकीकृत कृषि प्रणाली के जरिए रोजगार सृजन के प्रयासों की जानकारी दी। पिरूल से उत्पाद तैयार करने वाली गीता पंत और सुमन पांथरी, बागवानी से जुड़े महाबल नेगी तथा मोटे अनाज से बने उत्पादों की बेकरी संचालित करने वाली कल्पना बिष्ट ने भी अपने काम के बारे में बताया।
उत्तराखंड से जर्मनी तक रोजगार की राह
टिहरी की सपना राणा ने बताया कि मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें जर्मनी में नर्सिंग के क्षेत्र में नौकरी मिली।
सिंगापुर से ऑनलाइन जुड़े टनकपुर मूल के शैलेश ने सीवरेज जल शोधन के क्षेत्र में अपने काम की जानकारी दी। उन्होंने चंपावत के एक गांव के विकास में सहयोग करने की इच्छा जताई। वहीं, अनीता शर्मा थपलियाल ने विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को साझा किया।
स्थानीय हुनर को अवसरों से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधन, स्थानीय उत्पाद और युवाओं की प्रतिभा रोजगार के नए रास्ते खोल सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण दूसरे लोगों को भी स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
नियोजन विभाग और देवभूमि डायलॉग के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाले लोगों की उपलब्धियों पर प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।

