“उत्तराखण्ड में रोप-वे क्रांति की शुरुआत: 6 मेगा प्रोजेक्ट्स पर फोकस, केदारनाथ–हेमकुण्ट साहिब रोप-वे को मिली गति”

 

 

 

 

TMP: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में प्रदेश रोप-वे विकास संचालन समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें राज्यभर में रोप-वे निर्माण को तेज़ी देने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि रोप-वे विकास समिति की प्रथम बोर्ड बैठक इस माह के अंत तक हर हाल में आयोजित की जाए, जिसमें सचिव पर्यटन सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने एनएचएलएमएल को आदेश दिया कि एक सप्ताह में एसपीवी का सीईओ नियुक्त किया जाए, ताकि दिसंबर अंत तक बोर्ड बैठक सुनिश्चित हो सके। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि राज्य में प्रस्तावित सभी रोप-वे प्रोजेक्ट्स को इस समिति से स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा, जिससे अलग-अलग एजेंसियों द्वारा तैयार योजनाओं में डुप्लीकेसी न रहे।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 50 रोप-वे प्रस्तावित हैं, जिनमें से 6 प्रमुख प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता पर रखा गया है। इनमें

  • सोनप्रयाग–केदारनाथ

  • गोविन्दघाट–हेमकुण्ट साहिब

    के कार्य आबंटित किए जा चुके हैं।

जबकि

  • काठगोदाम–हनुमानगढ़ी मंदिर (नैनीताल) अनुमोदन चरण में

  • कनकचौरी–कार्तिक स्वामी रोप-वे की डीपीआर तैयारी पर

  • रैथल-बारसू–बरनाला (उत्तरकाशी)

  • जोशीमठ–औली–गौरसों

    के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इन छह प्रोजेक्ट्स पर शुरुआती फोकस रखा जाए, और विशेष रूप से केदारनाथ व हेमकुण्ट साहिब रोप-वे के लिए स्टेज-वाइज टाइमलाइन और पर्ट चार्ट तैयार किए जाएं। उन्होंने कहा कि वन एवं वन्यजीव स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

रोप-वे निर्माण में भारी मशीनरी को निर्माण स्थल तक ले जाने के दौरान आने वाली चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने सड़कों के टर्निंग रेडियस बढ़ाने और पुलों के सुदृढ़ीकरण के लिए अभी से कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने काठगोदाम–हनुमानगढ़ी रोप-वे प्रोजेक्ट में कैंचीधाम को भी शामिल करने की सलाह दी, क्योंकि यहां श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ रोप-वे की आवश्यकता को मजबूत करती है।

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