देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी के ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर पर गुरुवार सुबह एक बार फिर जज़्बे, अनुशासन और गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला। कमांडेंट परेड के दौरान ऑफिसर कैडेट्स ने ऐसी ताक़तवर कदमताल की कि पूरा परिसर जोश के नारों से गूंज उठा। परेड के समापन क्षण में आकाश से हेलीकॉप्टरों द्वारा की गई पुष्पवर्षा ने माहौल को और भी रोमांचित कर दिया।
पासिंग आउट परेड से पहले बड़ी परीक्षा
शनिवार को होने वाली मुख्य पासिंग आउट परेड से पहले आयोजित यह कमांडेंट परेड कैडेट्स के लिए अंतिम बड़ा अभ्यास था। कैडेट्स ने रैतिक अनुशासन, तालमेल और सैन्य प्रशिक्षण की पराकाष्ठा प्रदर्शित करते हुए यह साबित किया कि वे देश की वर्दी पहनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
कमांडेंट का संदेश: अब जिम्मेदारी आपकी
कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने परेड की सलामी ली। कैडेट्स को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की प्रतिष्ठा और उसकी गौरवशाली परंपराएँ अब उनके कंधों पर होंगी।
उन्होंने कहा—
“एक अधिकारी की असली पहचान उसके चरित्र, क्षमता और संवेदना में होती है। यही मूल मूल्य आपको जीवनभर मार्गदर्शन देंगे।”
उन्होंने कैडेट्स को यह भी याद दिलाया कि सैन्य जीवन आराम का नहीं, बल्कि कर्तव्य, नेतृत्व और राष्ट्र सेवा का मार्ग है।
विदेशी कैडेट्स भी केंद्र में रहे
इस बार परेड में शामिल विदेशी कैडेट्स भी आकर्षण का केंद्र बने। कमांडेंट ने उनके प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं लिया बल्कि आइएमए में दोस्ती, विश्वास और भाईचारे की मजबूत नींव भी रखी।
अनुशासन और एकता—भविष्य की दिशा
कमांडेंट ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान विकसित हुई एकजुटता और फौलादी अनुशासन कैडेट्स को भविष्य में आने वाली हर चुनौती का सामना करने की शक्ति देगा—चाहे वह सीमा की सुरक्षा हो या वैश्विक मिशन।
भीड़ का उमड़ना और गूंजता गर्व
परेड देखने के लिए बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक, विद्यार्थी और शहर के गणमान्य लोग पहुंचे। हर कदम के साथ मैदान में गूंजता कैडेट्स का आत्मविश्वास दर्शकों के लिए गर्व का अनुभव बन गया।
