एक्स-रे से ईसीजी तक मुफ्त जांच, उत्तराखंड की श्रमिक स्वास्थ्य योजना का यूपी ने किया अध्ययन

 

 

 

देहरादून: निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा देने की उत्तराखंड सरकार की पहल दूसरे राज्यों का ध्यान खींच रही है। मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत अब तक करीब 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इसी मॉडल का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश के अधिकारियों की एक टीम देहरादून पहुंची और योजना की कार्यप्रणाली व तकनीकी व्यवस्था की जानकारी ली।

उत्तर प्रदेश के अपर श्रमायुक्त जुनैद अहमद के नेतृत्व में आई टीम ने श्रमिकों के पंजीकरण और सत्यापन से लेकर स्वास्थ्य जांच, रिपोर्ट उपलब्ध कराने तथा गंभीर बीमारी की स्थिति में उपचार के लिए रेफरल तक की प्रक्रिया समझी। बैठक में उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

कार्यस्थल पर ही 44 तरह की मुफ्त जांच

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई 2026 को श्रमिक कल्याण योजनाओं के शुभारंभ के दौरान दो मोबाइल मेडिकल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल और आवास स्थल पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

योजना के तहत एक्स-रे, ईसीजी सहित 44 प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा दी जा रही है। इससे श्रमिकों को जांच के लिए अलग से स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने की जरूरत कम होती है और बीमारियों की समय रहते पहचान करने में मदद मिलती है।

बिना अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के 60 हजार श्रमिकों तक पहुंच

उत्तराखंड के श्रमायुक्त एवं भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव प्रकाश चन्द्र दुम्का ने उत्तर प्रदेश की टीम को योजना की जानकारी देते हुए बताया कि उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग कर करीब 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि योजना में पात्र आश्रितों को भी स्वास्थ्य जांच से जोड़ने, गंभीर बीमारियों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की व्यवस्था है। अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी नवाचार, बेहतर प्रबंधन और विभिन्न विभागों के समन्वय से योजना को लागू किया जा रहा है।

जांच के बाद इलाज तक पहुंचाने पर भी जोर

मुख्यमंत्री धामी ने योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि जांच में बीमारी सामने आने पर श्रमिकों के समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश की टीम ने जांच शिविरों के संचालन, रिपोर्ट तैयार करने, गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार के लिए रेफरल प्रक्रिया का अध्ययन किया। इस दौरान दोनों राज्यों के बीच श्रमिक कल्याण से जुड़े अनुभव साझा करने पर भी चर्चा हुई।

उत्तराखंड सरकार की इस पहल का उद्देश्य श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के साथ बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार की राह आसान बनाना है। अध्ययन भ्रमण के जरिए उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने इस व्यवस्था को अपने राज्य में लागू करने की संभावनाओं को समझा।

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