खटीमा के एकलव्य स्कूल को ₹10 करोड़, 480 छात्रों की क्षमता के साथ होगा विस्तार

 

 

 

 

खटीमा: उत्तराखंड आदि रंगोत्सव के दौरान खटीमा के एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल को लेकर बड़ी घोषणा हुई। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने विद्यालय के विस्तार और सुविधाओं के लिए करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले हॉस्टल का टेंडर पूरा हो चुका है, जबकि निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।

240 बालक और 240 बालिकाओं के लिए व्यवस्था

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक खटीमा का एकलव्य विद्यालय कुल 480 विद्यार्थियों की क्षमता के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसमें 240 बालकों और 240 बालिकाओं के लिए अध्ययन की व्यवस्था होगी। उन्होंने विद्यालय के शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम का भी उल्लेख करते हुए इसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ा।

ओराम ने कहा कि बाजपुर, चकराता और देहरादून के कालसी क्षेत्र समेत राज्य के अन्य स्थानों पर संचालित एकलव्य विद्यालय भी जनजातीय विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं।

1999 में बना था अलग जनजातीय मंत्रालय

जनसभा को संबोधित करते हुए जुएल ओराम ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में केंद्र में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न जनजातीय समुदायों के विकास के लिए अलग-अलग योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से लागू करना था।

उन्होंने कहा कि थारू, बोक्सा, जौनसारी समेत जनजातीय समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से काम कर रही है।

किरेन रिजिजू ने जनजातीय विरासत को लेकर कही बात

केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने उत्तराखंड की जनजातीय विविधता का उल्लेख करते हुए थारू, बोक्सा, जौनसारी और राजी समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं को राज्य की पहचान का हिस्सा बताया।

उन्होंने जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया। रिजिजू ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है और पीएम-जनमन जैसी योजनाओं के जरिए दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक विकास योजनाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

कई राज्यों के कलाकारों ने दिखाई लोक संस्कृति

आदि रंगोत्सव में उत्तराखंड के साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, मिजोरम और उत्तर प्रदेश से पहुंचे जनजातीय कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।

लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत, कला और रंग-बिरंगी वेशभूषा के जरिए अलग-अलग राज्यों की जनजातीय संस्कृति की झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कलाकारों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया।

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