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छह साल बाद शुरू हुआ भारत-चीन सीमांत व्यापार फिर अटका, तकलाकोट में बिना माल बैठे व्यापारी

photo- gunji

 

 

 

धारचूला: छह साल के लंबे अंतराल के बाद दोबारा शुरू हुआ भारत-चीन (तिब्बत) सीमांत व्यापार शुरुआत में ही मुश्किलों में फंस गया है। तिब्बत की तकलाकोट मंडी पहुंचे भारतीय व्यापारी नए सामान और आगे के व्यापारिक दलों को अनुमति नहीं मिलने से परेशान हैं। मामले में जिला प्रशासन ने विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।

इस साल सीमित अवधि के लिए होने वाले पारंपरिक व्यापार को लेकर कारोबारियों ने कई महीनों तक तैयारी की थी। व्यापार कार्यालय धारचूला से 62 व्यापारियों और 92 सहायकों के लिए ट्रेड पास जारी किए गए थे। हालांकि, फिलहाल केवल 20 लोगों का पहला दल, जिसमें 16 व्यापारी और चार सहायक शामिल हैं, तकलाकोट पहुंच पाया है। बाकी व्यापारी अनुमति के इंतजार में भारत में ही रुके हुए हैं।

सामान नहीं पहुंचा, मंडी में पसरा सन्नाटा

तकलाकोट पहुंचे व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या सामान की है। भारत से नया माल नहीं पहुंचने के कारण कारोबार लगभग ठप पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि व्यापार की अवधि लगातार कम हो रही है, जबकि तकलाकोट में दुकानों और आवास का किराया भी देना पड़ रहा है।

व्यापारियों के मुताबिक बिना माल के बिक्री नहीं हो पा रही है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द सामान भेजने की अनुमति नहीं मिली तो इस साल का सीमित व्यापारिक सत्र प्रभावित हो सकता है।

अगले 32 व्यापारियों का दल भी इंतजार में

तकलाकोट जाने के लिए तैयार 32 व्यापारियों का अगला दल भी अनुमति के इंतजार में है। चीनी प्रशासन की ओर से अभी तक अगले दल को भेजने संबंधी कोई आधिकारिक संदेश ट्रेड कार्यालय को नहीं मिला है। इसके चलते व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

वहीं, तकलाकोट पहुंचे कुछ व्यापारियों ने एक और समस्या बताई है। उनका कहना है कि ट्रेड पास के आधार पर वहां बैंक खाता खोलने में पहचान सत्यापन की दिक्कत आ रही है, जिससे व्यापारिक लेन-देन भी प्रभावित हो रहा है।

प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से मांगी मदद

जिला प्रशासन का कहना है कि मामला अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा होने के कारण इसका समाधान उच्च स्तर पर ही संभव है। जिलाधिकारी आशीष भटगाई ने बताया कि स्थिति से विदेश मंत्रालय को अवगत कराते हुए पत्र भेजा गया है।

व्यापारियों की मांग है कि भारत सरकार चीनी प्रशासन के साथ तत्काल बातचीत कर सामान भेजने और शेष व्यापारियों को तकलाकोट जाने की अनुमति दिलाए, ताकि वर्षों बाद शुरू हुआ सीमांत व्यापार व्यवधान का शिकार न हो।

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