नई दिल्ली: जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। संसद ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा से पारित होने के बाद अब लोकसभा ने भी इसे स्वीकृति दे दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधन कानून का रूप ले लेगा।
क्या बदलेगा नए कानून में?
संशोधन का मुख्य उद्देश्य जन्म और मृत्यु के देर से होने वाले पंजीकरण को अधिक पारदर्शी और प्रमाण-आधारित बनाना है। सरकार का कहना है कि इससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी और फर्जी या संदिग्ध पंजीकरण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
21 दिन के भीतर कराना होगा रजिस्ट्रेशन
मौजूदा नियमों के अनुसार जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर स्थानीय रजिस्ट्रार को देना अनिवार्य है। इसके बाद भी अलग-अलग समयसीमा के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर पंजीकरण कराया जा सकता है।
एक से दो साल की देरी पर बदलेगा नियम
नए संशोधन के तहत यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी।
दो साल से अधिक की देरी पर कोर्ट का आदेश अनिवार्य
सबसे बड़ा बदलाव दो साल से अधिक पुराने मामलों में किया गया है। ऐसे मामलों में अब केवल प्रशासनिक अनुमति पर्याप्त नहीं होगी। पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) का आदेश अनिवार्य होगा।
डिजिटल रिकॉर्ड को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार पहले ही जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कदम उठा चुकी है। जन्म प्रमाण पत्र अब कई सरकारी सेवाओं—जैसे स्कूल में प्रवेश, सरकारी नौकरी, मतदाता सूची, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजी प्रक्रियाओं—में महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से समय पर रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा मिलेगा, रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय होंगे और वर्षों बाद कराए जाने वाले पंजीकरण की गहन जांच संभव हो सकेगी। इससे भविष्य में दस्तावेजों के दुरुपयोग और फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
