“बदरीनाथ-केदारनाथ को साक्षी मानकर बहस करें”—बीकेटीसी अध्यक्ष की गोदियाल को खुली चुनौती

photo- chanakymantra

 

 

  • दानराशि विवाद पर सियासी संग्राम तेज
  • हेमंत द्विवेदी बोले— ‘दोषी कोई भी हो, नहीं बख्शा जाएगा’

देहरादून: बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में कथित दानराशि अनियमितता को लेकर सियासत और तेज हो गई है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए उन्हें एक बार फिर दस्तावेजों के आधार पर सार्वजनिक बहस की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस तैयार है तो बदरीनाथ और केदारनाथ धाम को साक्षी मानकर खुली बहस की जा सकती है।

बीकेटीसी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में द्विवेदी ने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित कर्मचारी को तत्काल निलंबित किया गया, एफआईआर दर्ज कराई गई और राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस और विभागीय स्तर पर जांच जारी है और दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होगी।

‘इस्तीफा नहीं, जिम्मेदारी निभा रहा हूं’

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे से जुड़े सवाल पर द्विवेदी ने कहा कि बीकेटीसी किसी फ्रेंचाइजी की तरह संचालित नहीं होती। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह इस्तीफा देने नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए बैठे हैं और श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है।

कांग्रेस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

द्विवेदी ने दावा किया कि विवादित कर्मचारी का नियमितीकरण वर्ष 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमितीकरण के बाद नियमों के विपरीत उसे उच्च वेतनमान और ग्रेड-पे का लाभ दिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय बीकेटीसी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मंदिर समिति की निधि का उपयोग अन्य विकास कार्यों में किया गया।

‘क्लीन चिट देने का सवाल ही नहीं’

एफआईआर में देरी और कर्मचारी को कथित क्लीन चिट देने के आरोपों को खारिज करते हुए द्विवेदी ने कहा कि 3 जुलाई को मामला सामने आते ही उन्होंने मुख्य कार्याधिकारी को जांच, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और संबंधित कर्मचारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर किसी को बचाने की कोशिश नहीं की गई।

श्रद्धालुओं का भरोसा सबसे अहम

बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि चारधाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। भविष्य में मंदिरों की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए तकनीकी सुधार किए जाएंगे, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

अंत में उन्होंने गणेश गोदियाल को फिर चुनौती देते हुए कहा कि बहस की तारीख और समय कांग्रेस तय करे, जबकि स्थान बदरीनाथ या केदारनाथ धाम रखा जाए, ताकि जनता के सामने दस्तावेजों के आधार पर सच्चाई रखी जा सके।

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