नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्य बनने की दिशा में भारत ने अपना चुनावी अभियान औपचारिक रूप से शुरू कर दिया है। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को ‘SHANTI’ अभियान लॉन्च किया, जिसके माध्यम से भारत वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश करेगा।
SHANTI का अर्थ है “Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity”, यानी मानकों, विश्वास और ईमानदारी के जरिए समग्र विकास सुनिश्चित करना। अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में कई देशों के राजदूतों और वरिष्ठ राजनयिकों ने भाग लिया।
सुरक्षा परिषद की एशिया-प्रशांत श्रेणी की अस्थायी सीट के लिए चुनाव जून 2027 में होंगे। इस सीट पर भारत का मुकाबला तजाकिस्तान से होगा। इससे पहले भारत 2021-22 में भी UNSC का अस्थायी सदस्य रह चुका है और उस दौरान आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, शांति स्थापना और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई थी।
भारत का यह अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना में व्यापक सुधार समय की आवश्यकता है।
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग करता रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि केवल अस्थायी सीटों की संख्या बढ़ाने से वास्तविक सुधार नहीं होगा, क्योंकि निर्णय लेने की प्रक्रिया पर स्थायी सदस्यों का प्रभाव बना रहेगा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने भी हाल में कहा था कि परिषद में सुधार की प्रक्रिया को कुछ देश वर्षों से नियमों की आड़ में टालते रहे हैं, लेकिन अब इस स्थिति को लंबे समय तक जारी नहीं रहने दिया जा सकता।
‘SHANTI’ अभियान के साथ भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह केवल UNSC की एक अस्थायी सीट का दावेदार नहीं, बल्कि वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार और ग्लोबल साउथ की प्रभावी आवाज़ बनने के अपने संकल्प को भी आगे बढ़ा रहा है।