चारधाम यात्रा में घोड़े-खच्चरों के लिए सख्त नियम लागू, केदारनाथ मार्ग पर 5000 पशुओं की सीमा तय

 

 

 

 

TMP: उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षित और सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के साथ-साथ घोड़े-खच्चरों के कल्याण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। शासन ने केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलास यात्रा मार्गों पर अश्ववंशीय पशुओं के संचालन के लिए नई मानक प्रचालन कार्यविधि (SOP) जारी कर दी है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत यात्रा मार्गों की वहन क्षमता भी तय कर दी गई है। इसके अनुसार केदारनाथ मार्ग पर अधिकतम 5000, यमुनोत्री मार्ग पर 595 और हेमकुंड साहिब मार्ग पर 1050 घोड़े-खच्चरों के संचालन की अनुमति होगी। शासन का मानना है कि इससे यात्रा मार्गों पर भीड़ नियंत्रण और पशुओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा।

एसओपी के अनुसार अब यात्रा मार्गों पर संचालित सभी घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण अनिवार्य होगा। संचालन से पहले पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स जांच, इयर टैगिंग और माइक्रोचिपिंग कराना जरूरी होगा। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता 45 दिनों तक रहेगी। बिना पंजीकरण वाले पशुओं के संचालन पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। पशुओं का वार्षिक पंजीकरण जिला प्रशासन और जिला पंचायत की ओर से किया जाएगा।

सरकार ने पशु क्रूरता के मामलों पर भी सख्त रुख अपनाया है। अधिक भार ढोने, घायल या बीमार पशुओं से काम लेने, पशुओं को पीटने, तेज गति से दौड़ाने या इयर टैग और माइक्रोचिप से छेड़छाड़ करने पर संबंधित पशु स्वामी के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में लाइसेंस निरस्त करने, ब्लैकलिस्ट करने और पुलिस मुकदमा दर्ज कराने का भी प्रावधान किया गया है।

नई व्यवस्था की निगरानी के लिए “म्यूल टास्क फोर्स” का गठन किया जाएगा। इसमें पशुपालन विभाग के चिकित्सक, कर्मचारी और जिला पंचायत के कार्मिक शामिल होंगे। यात्रा मार्गों पर अतिरिक्त चेकपोस्ट, रात्रि गश्त, डिजिटल रिकॉर्डिंग और नियमित निगरानी भी अनिवार्य की गई है। साथ ही पशु क्रूरता की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन भी शुरू की जाएगी।

एसओपी में यह भी तय किया गया है कि यात्रा मार्ग पर प्रत्येक एक किलोमीटर की दूरी पर पशुओं के लिए स्वच्छ पानी, चारा और इलेक्ट्रोलाइट की व्यवस्था करनी होगी। हल्की और वाटरप्रूफ काठी का ही उपयोग किया जाएगा। संवेदनशील स्थानों और पानी के ट्रफ के पास सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले घोड़े-खच्चरों का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

इसके अलावा टोकन सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक ही जारी किए जाएंगे और खराब मौसम की स्थिति में पशुओं का संचालन बंद रखा जाएगा। बीमार और घायल पशुओं के उपचार के लिए स्थायी और अस्थायी पशु अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक पशु के साथ एक हाकर जरूरी होगा और एक पशु स्वामी अधिकतम दो पशुओं का ही संचालन कर सकेगा।

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