देहरादून: कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड के छात्रों के सामने परीक्षा केंद्र आवंटन को लेकर गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने आवेदन करते समय अपने राज्य को प्राथमिकता दी थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब जैसे दूरदराज के केंद्र दे दिए गए हैं। इस फैसले से छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ गई हैं।
300 से 500 किलोमीटर का सफर बना मजबूरी
देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी और अल्मोड़ा जैसे जिलों के छात्रों को परीक्षा देने के लिए 300 से 500 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ रही है।
पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए यह और भी मुश्किल हो जाता है, जहां यात्रा पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहती है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और कठिन है। यात्रा, ठहरने और खाने-पीने का अतिरिक्त खर्च अभिभावकों पर भारी पड़ रहा है।
छात्रों पर बढ़ा मानसिक दबाव
छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने स्पष्ट रूप से उत्तराखंड को अपनी पहली पसंद के रूप में चुना था, तो फिर उन्हें बाहर के राज्यों में क्यों भेजा गया।
इस अव्यवस्था को लेकर परीक्षा आयोजित कराने वाली National Testing Agency (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा से पहले ही इस तरह की परेशानियां उनके मानसिक तनाव को बढ़ा रही हैं, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
स्थानीय केंद्र होने के बावजूद अनदेखी
इस बीच Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University ने अपने चौरास परिसर में कंप्यूटर साइंस विभाग की लैब को परीक्षा केंद्र के रूप में तैयार किया है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब राज्य में पर्याप्त केंद्र उपलब्ध हैं, तो उनका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा।
विश्वविद्यालय ने एनटीए को लिखा पत्र
मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एनटीए को पत्र भेजकर केंद्रों में संशोधन की मांग की है।
सेंटर एस्टेब्लिशमेंट प्रभारी डॉ. अमरजीत के अनुसार, छात्रों की शिकायतों को देखते हुए एनटीए से अनुरोध किया गया है कि स्थानीय स्तर पर ही परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए दूसरे राज्यों में परीक्षा देना छात्रों के लिए बड़ी चुनौती है।
अब सभी की नजर एनटीए के फैसले पर टिकी है—क्या छात्रों को राहत मिलेगी या उन्हें लंबी दूरी तय कर ही परीक्षा देनी होगी?
