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मसूरी में पेड़ कटान पर हाईकोर्ट सख्त, नगर पालिका को झटका—बिना अनुमति हरियाली पर रोक

 

 

 

 

नैनीताल: पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मसूरी में पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगा दी है। कोर्ट ने बिना अनुमति सड़क और खेल मैदान निर्माण के लिए पेड़ काटने के मामले में नगर पालिका, राज्य सरकार और वन विभाग से जवाब तलब किया है।

यह मामला मसूरी स्थित एमपीजी कॉलेज परिसर से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर बांज जैसे बहुमूल्य पेड़ों को बिना वन विभाग की अनुमति के काटा गया। इस पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई।

“किसकी अनुमति से कटे पेड़?”—कोर्ट का तीखा सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि आखिर किसकी मंजूरी से पेड़ों की कटाई की जा रही है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली सुनवाई तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार का पेड़ कटान नहीं होगा।

चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश

खंडपीठ ने मसूरी नगर पालिका, राज्य सरकार और वन विभाग को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी पक्षों से तथ्यों के साथ जवाब प्रस्तुत करने को कहा।

जनहित याचिका में गंभीर आरोप

याचिका एमपीजी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष और पर्यावरण प्रेमी प्रवेश राणा द्वारा दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया कि कॉलेज परिसर की भूमि पर सड़क और खेल मैदान निर्माण के लिए निविदा जारी कर बांज सहित कई महत्वपूर्ण पेड़ काट दिए गए, जबकि इसके लिए वन विभाग की अनुमति अनिवार्य है।

फोटो पर भी हुआ विवाद

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत पेड़ों के कटान की तस्वीरों पर भी बहस हुई। नगर पालिका ने इन तस्वीरों को संबंधित स्थल का न बताते हुए खारिज किया, लेकिन वन विभाग ने इन्हें उसी स्थान का बताया। राज्य सरकार की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि पेड़ काटने के लिए अनुमति नहीं ली गई थी।

इस आदेश के बाद साफ है कि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर न्यायपालिका सख्त है और आने वाले दिनों में इस मामले में और कड़े निर्देश सामने आ सकते हैं।

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