TMP: मिडिल ईस्ट में बढ़े सैन्य तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के अमेरिका–इजरायल हमले में मारे जाने की खबर ने कई देशों में उग्र प्रतिक्रियाएं जन्म दे दी हैं। दुनिया भर के शिया समुदायों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है, जिसका तीखा असर पाकिस्तान में सामने आया है।
कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हमला
Karachi में सैकड़ों प्रदर्शनकारी अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर जमा हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, भीड़ ने मुख्य गेट पर हथौड़ों और लोहे की रॉड से हमला किया और परिसर में घुसने की कोशिश की। कुछ वीडियो में इमारत के हिस्सों से धुआं उठता दिखाई दे रहा है। हालात काबू में लाने के लिए सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले दागने और लाठीचार्ज करना पड़ा।
इस्लामाबाद और लाहौर में भी तनाव
राजधानी Islamabad और Lahore में भी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। लाहौर में शुरू हुआ जुलूस दोपहर तक हिंसक हो गया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए फायरिंग की। शुरुआती रिपोर्टों में कम से कम 12 लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है।
क्षेत्रीय असर: बगदाद से भारत तक विरोध
प्रदर्शन केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहे। Baghdad और Turkey के कई शहरों में भी विरोध मार्च निकाले गए। भारत में भी दिल्ली, लखनऊ, बेंगलुरु और कश्मीर समेत कई स्थानों पर लोगों ने खामेनेई की तस्वीरों के साथ प्रदर्शन किए। कुछ जगहों पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के पुतले जलाने की घटनाएं सामने आईं।
भावनात्मक और राजनीतिक असर
खामेनेई को मिडिल ईस्ट में प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक नेता के रूप में देखा जाता था। उनकी मौत ने केवल भू-राजनीतिक समीकरण नहीं बदले, बल्कि आम लोगों की भावनाओं को भी गहराई से झकझोर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात जल्द काबू में नहीं आए, तो यह विरोध और व्यापक अस्थिरता का रूप ले सकता है।
वर्तमान स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। कई देशों ने अपने दूतावासों और नागरिकों की सुरक्षा बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह गुस्सा सीमित रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता में बदल जाएगा।