सरकार जल्द करेगी नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन की रूपरेखा घोषित, राज्यों को तैयारी के संकेत

 

 

 

नई दिल्ली: एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के बाद केंद्र सरकार अब नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन को धरातल पर उतारने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पिछले सप्ताह राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन के शीघ्र कार्यान्वयन के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इससे जुड़ी विस्तृत घोषणा कर सकती है।

वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत कर जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक ले जाने के उद्देश्य से इस मिशन का ऐलान किया गया था, लेकिन अब तक इसकी गाइडलाइंस सार्वजनिक नहीं की गई थीं। नीति आयोग पहले ही संकेत दे चुका है कि मिशन के तहत राज्यों को अपनी नीतियां और ढांचा तैयार रखने को कहा गया है, ताकि वैश्विक निवेश को आकर्षित किया जा सके।

निर्माण क्षेत्र की बाधाएं होंगी दूर

सूत्रों के अनुसार, नेशनल मैन्यूफैक्चरिंग मिशन के तहत उद्योगों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों को दूर करने पर फोकस किया जाएगा। जमीन की उपलब्धता, कुशल श्रमिकों की कमी और लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरियों को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि देश के सभी क्षेत्रों में मैन्यूफैक्चरिंग निवेश पहुंचे और क्षेत्रीय असंतुलन कम हो।

इसके लिए देश को पांच प्रमुख जोन में विभाजित कर आधुनिक मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जहां नए उद्यमियों को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वर्तमान में जटिल प्रक्रियाओं और भूमि संकट के चलते नए निवेशक इस क्षेत्र में सीमित संख्या में आ रहे हैं।

स्टार्टअप और निवेश पर विशेष जोर

मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में स्टार्टअप्स की संख्या अभी बेहद कम है। पिछले एक दशक से जीडीपी में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 15 से 17 प्रतिशत के बीच बनी हुई है। वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को 8–9 प्रतिशत की स्थिर आर्थिक वृद्धि के साथ मैन्यूफैक्चरिंग में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाना होगा।

मैन्यूफैक्चरिंग-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर कदम

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मिशन का दीर्घकालिक उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को कृषि आधारित ढांचे से आगे ले जाकर मैन्यूफैक्चरिंग-प्रधान मॉडल की ओर ले जाना है। इसके तहत रोजगार सृजन वाले क्षेत्रों के साथ-साथ हाई-टेक मैन्यूफैक्चरिंग को प्रोत्साहन दिया जाएगा। मशीनरी निर्माण पर विशेष ध्यान देने की संभावना है, क्योंकि इस क्षेत्र में भारत अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

इसके अलावा भारतीय कंपनियों को विदेशों में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने या वैश्विक बाजारों में विस्तार के लिए भी सरकारी समर्थन मिल सकता है। कई देशों में कुशल श्रमिकों की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिसे देखते हुए भारत के पास वैश्विक मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने का अवसर है।

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