सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हरकत में सरकार, ऋषिकेश वन भूमि मामले की 15 दिन में जांच

 

 

 

देहरादून : उत्तराखंड में वन भूमि पर अतिक्रमण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। अदालत की नाराजगी के तुरंत बाद शासन ने ऋषिकेश से जुड़े एक बड़े भूमि प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति को 15 दिनों के भीतर जमीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड, लीज शर्तों और मौजूदा हालात की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपनी होगी।

शासन सूत्रों के मुताबिक, समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और पूरी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी रखी जाएगी।

2866 एकड़ भूमि की लीज सवालों के घेरे में

मामला ऋषिकेश क्षेत्र की लगभग 2866 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसे वर्ष 1950 में 99 साल की लीज पर पशु लोक सेवा मंडल संस्थान को आवंटित किया गया था। यह लीज वर्ष 2049 तक वैध है। शर्तों के अनुसार, इस भूमि का उपयोग पशुपालन, चारा उत्पादन और उद्यान जैसे सीमित उद्देश्यों के लिए किया जाना था।

लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि समय के साथ इस भूमि का उपयोग निर्धारित शर्तों के विपरीत किया गया और कुछ हिस्सों को कथित तौर पर सबलेट भी कर दिया गया। इन्हीं तथ्यों को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए कड़ी टिप्पणी की थी।

कौन करेगा जांच?

शासन द्वारा गठित समिति की अध्यक्षता मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) धीरज पांडे करेंगे। समिति में सीएफ शिवालिक, डीएफओ देहरादून, एडीएम (वित्त) और एसडीएम ऋषिकेश को सदस्य बनाया गया है।

समिति आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए गूगल मैप और अन्य डिजिटल माध्यमों से भूमि की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगी। साथ ही लीज से जुड़े सभी दस्तावेजों, रिकॉर्ड और प्रशासनिक फाइलों की भी बारीकी से जांच की जाएगी।

जमीन पर जाकर होगी पड़ताल

सूत्रों के अनुसार, समिति जल्द ही संबंधित भूमि का स्थलीय निरीक्षण भी करेगी, ताकि यह साफ हो सके कि धरातल पर वास्तव में क्या स्थिति है। जांच के दौरान यह अहम सवाल भी उठेगा कि यदि लीज शर्तों का उल्लंघन हुआ, तो वर्षों तक संबंधित विभागों ने कार्रवाई क्यों नहीं की।

समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थानों पर किस तरह की प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह मामला राज्य सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

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