देहरादून: डिजिटल इंडिया भाषिणी (BHASHINI) डिवीजन (डीआईबीडी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड राज्य आईटी मिशन, उत्तराखंड सरकार के सहयोग से ‘BHASHINI राज्यम् कार्यशाला: उत्तराखंड अध्याय’ का आयोजन 17 दिसंबर 2025 को होटल रमाडा, देहरादून में किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य एआई-संचालित भाषा नवाचार के माध्यम से वॉइस-फर्स्ट डिजिटल गवर्नेंस को सशक्त बनाना और गढ़वाली एवं कुमाऊनी भाषाओं की डिजिटल परिवर्तन यात्रा को गति देना है।
भारत सरकार की प्रमुख पहल राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन—BHASHINI का लक्ष्य एआई आधारित टूल्स के जरिए भाषा बाधाओं को समाप्त करना है, ताकि सभी भारतीय भाषाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाएं सुलभ हो सकें। उत्तराखंड अध्याय में नागरिकों को गढ़वाली और कुमाऊनी में वॉइस व टेक्स्ट इंटरफेस के माध्यम से शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित आवश्यक सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिससे राज्य की भाषाई पहचान और मजबूत हो सके।
कार्यशाला के दौरान डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन द्वारा गढ़वाली और कुमाऊनी के लिए विकसित किए जा रहे एआई भाषा मॉडल, स्पीच रिकग्निशन सिस्टम और बहुभाषी अनुप्रयोगों से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी जाएगी। इन पहलों को सामुदायिक सहभागिता, नागरिक-नेतृत्व वाले भाषा योगदान तथा शैक्षणिक व संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि समावेशी और सतत डिजिटल भाषा विकास सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार, डिजिटल इंडिया BHASHINI डिवीजन, शैक्षणिक संस्थानों और सिविल सोसायटी के वरिष्ठ नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य हितधारक भाग लेंगे। इस दौरान वॉइस-फर्स्ट बहुभाषी गवर्नेंस के लिए BHASHINI के टूल्स का लाइव प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें मित्र (MITRA) कार्यक्रम भी शामिल है—जो राज्यों की सक्रिय भागीदारी से एआई समाधानों के सह-विकास का मॉडल प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर भाषिणी समुदाय की भी शुरुआत की जाएगी, जिसका उद्देश्य राज्य भाषा मिशनों की स्थापना कर राज्यों को डिजिटल भाषा अपनाने में नेतृत्व प्रदान करना है। साथ ही भाषादान नागरिक-योगदान मंच का लाइव प्रदर्शन होगा, जिसके माध्यम से नागरिकों को गढ़वाली और कुमाऊनी में वॉइस एवं टेक्स्ट डेटा दान के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि एआई मॉडल अधिक सशक्त बनें और स्पीच-आधारित सेवाओं की सटीकता बढ़े।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के लिए भाषा प्रौद्योगिकी को शासन प्रक्रियाओं में एकीकृत करने के रोडमैप पर विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही सरकारी अधिकारियों और तकनीकी टीमों के क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि BHASHINI टूल्स के प्रभावी उपयोग से डिजिटल सेवाएं अधिक समावेशी, सुलभ और भाषाई रूप से प्रासंगिक बन सकें।