TMP: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में पिछले कुछ महीनों से जारी तनाव के बीच भारत ने रूस के साथ एक बड़ी औद्योगिक साझेदारी को अंतिम रूप दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने और रूस से तेल आयात न करने के लगातार दबाव के बीच यह कदम भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
दरअसल, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (यूएसी) ने सुखोई सुपरजेट एसजे-100 नागरिक विमान के संयुक्त उत्पादन के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौते के तहत दोनों देश नागरिक उड्डयन क्षेत्र में आपसी सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एचएएल और यूएसी की साझेदारी में बनने वाली यह परियोजना भारत को विमान निर्माण के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं के नए स्तर तक पहुँचाने में सहायक होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी से भारत के घरेलू नागरिक उड्डयन उद्योग में एक नई क्रांति आ सकती है। यह न केवल “मेक इन इंडिया” पहल को सशक्त बनाएगा बल्कि “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को भी मज़बूती देगा।
बताया जा रहा है कि भारत अब एचएएल और यूएसी के सहयोग से एसजे-100 नागरिक विमान का उत्पादन शुरू करने की दिशा में अग्रसर है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश में क्षेत्रीय हवाई संपर्क (Regional Connectivity) को बढ़ावा देना और विमान निर्माण उद्योग में तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करना है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह पहल भारत में नागरिक उड्डयन के लिए एक नए युग की शुरुआत करेगी। इससे न केवल क्षेत्रीय विमानों की बढ़ती माँग को पूरा किया जा सकेगा बल्कि देश में तकनीकी कौशल विकास, रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।
अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच यह साझेदारी भारत के लिए राजनयिक और औद्योगिक दोनों स्तरों पर बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
