पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अब सिर्फ दो हफ्ते बचे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर एनडीए और महागठबंधन के बीच राजनीतिक सियासत तेज हो गई है। गुरुवार को महागठबंधन ने आखिरकार तेजस्वी यादव को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया, जिसके बाद विपक्ष ने एनडीए से पूछा — “आपका चेहरा कौन है?”
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव के नाम की घोषणा करते हुए कहा, “गठबंधन इस युवा नेता के विज़न पर भरोसा करता है।” गहलोत ने एनडीए पर निशाना साधते हुए कहा, “दो दशक से सत्ता में रहने के बावजूद आज यह साफ नहीं है कि अगर वे जीतते हैं तो सरकार का नेतृत्व कौन करेगा।”
दूसरी ओर, एनडीए अब भी अपने मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं कर सका है। हालांकि गृह मंत्री अमित शाह ने यह जरूर स्पष्ट किया कि “चुनाव जेडीयू के दिग्गज नेता नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है”, लेकिन उन्होंने उन्हें औपचारिक रूप से सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया।
जब अमित शाह से पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे, तो उन्होंने कहा, “यह तय करने वाला मैं नहीं हूँ। फिलहाल हम उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं, चुनाव के बाद सभी सहयोगी दल मिलकर निर्णय लेंगे।”
नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर उठ रहे सवालों और सत्ता विरोधी लहर के बीच एनडीए की रणनीति स्पष्ट नहीं दिख रही है। वहीं महागठबंधन तेजस्वी यादव के नेतृत्व में एकजुट दिखाई देने की कोशिश कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए का यह अस्पष्ट रुख विपक्ष को हमला करने का बड़ा मौका दे रहा है, जबकि भाजपा केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही राज्य चुनाव जीतने की रणनीति दोहरा रही है।
