राष्ट्रपति ने कहा – सिनेमा सिर्फ लोकप्रिय ही नहीं, जनहितकारी भी होना चाहिए
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च फिल्म सम्मान, 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का आयोजन सोमवार को नई दिल्ली में हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजेताओं को सम्मानित किया और भारतीय सिनेमा को समाज का आईना और सकारात्मक बदलाव का माध्यम बताते हुए कहा कि “सिनेमा केवल लोकप्रिय ही नहीं, बल्कि बड़े जनहित की पूर्ति करने वाला माध्यम होना चाहिए।”
महिलाओं की भागीदारी पर जोर
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारतीय सिनेमा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज महिलाएँ न केवल पर्दे पर, बल्कि निर्देशन, लेखन, संगीत और तकनीकी क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। राष्ट्रपति ने सिनेमा इंडस्ट्री से अपील की कि महिलाओं को समान अवसर ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन दोनों जगह मिलें।
मोहनलाल को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार
मलयालम सिनेमा के महानायक मोहनलाल को इस वर्ष का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा में उनके चार दशकों से अधिक के असाधारण योगदान की मान्यता स्वरूप दिया गया।
पुरस्कार ग्रहण करते हुए मोहनलाल भावुक हो उठे। उन्होंने इसे “जादुई और पवित्र क्षण” बताते हुए कहा –
“सिनेमा मेरी आत्मा की धड़कन है। इस सम्मान को मैं मलयालम सिनेमा के उन गुरुओं और मास्टर्स को समर्पित करता हूँ जिन्होंने मुझे गढ़ा और दिशा दी।”
मोहनलाल को भारतीय सिनेमा का आइकन ऑफ वर्सेटिलिटी माना जाता है। एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी और सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों में उनकी भूमिकाओं को दर्शकों और आलोचकों दोनों ने सराहा है।
सरकार की नई पहल
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सिनेमा उद्योग के भविष्य को लेकर कई घोषणाएँ कीं। उन्होंने कहा कि सरकार –
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स्वदेशी फिल्म उपकरणों के निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देगी।
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लाइव कॉन्सर्ट इकॉनमी को मजबूत करेगी ताकि कलाकारों को अधिक अवसर मिलें।
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और मॉडल स्टेट सिनेमा रेगुलेशन रूल्स तैयार किए जाएंगे, जिससे फिल्मों के निर्माण और प्रदर्शन को और पारदर्शी बनाया जा सके।
मंत्री ने कहा कि ये सभी प्रयास “विकसित भारत 2047” के विज़न को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम होंगे।
सिनेमा – समाज का आईना
71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह ने एक बार फिर यह साबित किया कि भारतीय सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं, बल्कि समाज के विचार, भावनाओं और संघर्षों का दस्तावेज भी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और सरकार के संदेश ने इंडस्ट्री को यह संकेत दिया कि आने वाले समय में सिनेमा को और व्यापक जिम्मेदारी के साथ देखा जाएगा।
