देहरादून: उत्तराखंड में बीते दो दिनों से जारी मूसलधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। हरिद्वार की सड़कों से लेकर नैनीताल की वादियों तक, पानी और कीचड़ के बीच जिंदगी रेंगती नजर आ रही है। राजधानी देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, टिहरी और उधम सिंह नगर जैसे प्रमुख जिलों में जलभराव, भूस्खलन और सड़कों पर गिरते बोल्डरों की घटनाओं ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है।
हरिद्वार में जलसैलाब, सड़कें बनीं नदी
हरिद्वार की सड़कों पर इतना पानी भर गया कि दोपहिया और चौपहिया वाहन तक पानी में तैरते नजर आए। शहर के निचले इलाकों में जलभराव ने आम लोगों की आवाजाही ठप कर दी है।
ऋषिकेश में उफनाई गंगा, आरती स्थल डूबे
ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। परमार्थ निकेतन और त्रिवेणी घाट पर आरती स्थल पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। शिव की विशाल प्रतिमा को छूकर बहती गंगा की धारा लोगों को सावधान कर रही है। प्रशासन ने घाटों से दूरी बनाए रखने और निचले इलाकों को खाली करने की अपील की है।
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मौसम विभाग का दोहरा अलर्ट: ऑरेंज और येलो
मौसम विभाग ने नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर, देहरादून, टिहरी और पौड़ी में भारी बारिश की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि शेष प्रदेश के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने को कहा है। अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का पूर्वानुमान है।
स्कूलों में छुट्टी, बच्चों को घर में रहने की सलाह
देहरादून, हरिद्वार, चंपावत, टिहरी, पौड़ी और उधम सिंह नगर जिलों में भारी बारिश के मद्देनज़र कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। जिला प्रशासन ने बच्चों को अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दी है।
नैनीताल में छाया कोहरा, सड़कें बनीं खतरनाक
नैनीताल जिले के हल्द्वानी, लालकुआं, कालाढूंगी और रामनगर जैसे क्षेत्रों में घने कोहरे ने दृश्यता (विजिबिलिटी) को बहुत कम कर दिया है। सुबह के वक्त वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर बेहद सतर्कता से चलना पड़ा। मौसम विभाग का कहना है कि भारी बारिश के बाद वातावरण में बढ़ी नमी और गिरा तापमान कोहरे की वजह बना है, जो आगामी दो दिनों तक सुबह के समय बना रह सकता है।
एहतियात बरतें, सुरक्षित रहें
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी किनारों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें, किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें।
