TMP: भारतीय सेना को और ताकतवर बनाने की दिशा में स्वदेशी एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। 48 किलोमीटर तक सटीक मार करने वाली यह देसी तोप अब पुरानी और छोटी तोपों की जगह लेने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने इसे ‘शानदार मिशन मोड कामयाबी’ करार देते हुए कहा है कि यह आत्मनिर्भर भारत के सपने को हकीकत में बदल रही है।
12 साल में डिजाइन से इंडक्शन तक का सफर
ATAGS को DRDO के पुणे स्थित आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ARDE) ने डिजाइन किया है। प्रोजेक्ट की शुरुआत 2012 में हुई थी और ARDE के डायरेक्टर ए. राजू ने बताया कि “महज 12 साल में हमने डिजाइन से लेकर टेस्टिंग और इंडक्शन तक का सफर पूरा कर लिया।” रक्षा मंत्रालय ने अपने X अकाउंट पर इसका वीडियो शेयर कर इसकी ताकत का प्रदर्शन भी किया।
https://x.com/SpokespersonMoD/status/1942895968405311927
आधुनिक तकनीक और ऑल-इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम से लैस
ATAGS की सबसे बड़ी खासियत इसकी आधुनिक तकनीक और ऑल-इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम है, जो इसे रेगिस्तान और पहाड़ों जैसे कठिन इलाकों में भी बिना रुकावट ऑपरेशन करने में सक्षम बनाती है। यह सिस्टम तोप के मूवमेंट और गोला-बारूद की हैंडलिंग को आसान बनाता है, जिससे सेना के ऑपरेशनल कार्यों में तेजी और भरोसेमंदी बढ़ती है।
6,900 करोड़ में तैयार, अगले 5 साल में डिलीवरी
इस प्रोजेक्ट में DRDO, भारतीय सेना, और निजी-पब्लिक क्षेत्र की कंपनियों ने मिलकर काम किया है। ATAGS के लिए रक्षा मंत्रालय ने 26 मार्च को भारत फोर्ज लिमिटेड और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ 155mm/52 कैलिबर ATAGS और हाई मोबिलिटी व्हीकल्स की आपूर्ति के लिए करीब 6,900 करोड़ रुपये का करार किया था।
इस समझौते के तहत 307 ATAGS की डिलीवरी अगले पांच साल में पूरी होने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ATAGS भारतीय सेना के तोपखाने के आधुनिकीकरण का नेतृत्व कर रहा है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मिसाल बन रहा है।
