नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के लिए ऐतिहासिक क्षणों में एक और जुड़ गया है। आईएसएस (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) पर पहुंचे पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने मंगलवार को रेडियो के माध्यम से मेघालय और असम के छात्रों से सीधा संवाद किया। इस बातचीत के दौरान शुभांशु ने बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान की रोमांचक दुनिया से रूबरू कराया और उन्हें “आत्मविश्वास और जिज्ञासा के साथ आगे बढ़ने” की प्रेरणा दी।
“आप में से कई भविष्य में अंतरिक्ष यात्री बन सकते हैं और चंद्रमा की सतह पर चल सकते हैं,” – शुभांशु ने यह कहकर स्कूली छात्रों में जोश भर दिया। वे 26 जून से एक्सिओम-4 मिशन के तहत आईएसएस पर मौजूद हैं।
इस विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर लगने से दिन में 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त दिखते हैं। इसलिए वहां जीवन सूर्य की रोशनी से नहीं बल्कि ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) पर आधारित होता है।
शुभांशु ने बताया कि सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के कारण हड्डियों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है, इसलिए उन्हें हर दिन ट्रेडमिल, साइकिल और अन्य मशीनों की मदद से व्यायाम करना होता है ताकि वो धरती पर लौटकर भी स्वस्थ रहें।
उन्होंने कहा कि “मैं धरती पर लौटकर आप सभी का मार्गदर्शन करूंगा।” अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखना उनके लिए सबसे रोमांचकारी अनुभव रहा।
