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रुद्रप्रयाग में गुलदार का आतंक ,खेत में काम कर रही वृद्धा पर गुलदार का जानलेवा हमला, गांव में दहशत

 

 

रुद्रप्रयाग : रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार तहसील के डागी गांव में गुलदार के हमले की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। शनिवार सुबह करीब 9 बजे 63 वर्षीय चेता देवी पर उस वक्त गुलदार ने हमला कर दिया जब वे खेत में काम कर रही थीं। हमले में उनके सिर, हाथ और पैरों पर गंभीर चोटें आई हैं। परिजन उन्हें अगस्त्यमुनि के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए, जहां उनका इलाज जारी है।

स्कूल से महज़ 100 मीटर की दूरी पर हुआ हमला

गंभीर चिंता की बात यह है कि यह हमला एक प्राथमिक विद्यालय से मात्र 100 मीटर की दूरी पर हुआ है। स्कूल जल्द खुलने वाले हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भारी चिंता व्याप्त है।

पहली बार नहीं—डागी में लगातार बढ़ रहे हमले

डागी गांव के लोगों का कहना है कि यह कोई नई घटना नहीं है। इससे पहले भी गुलदार कई बार इंसानों पर हमला कर चुका है, लेकिन अब तक वन विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। गांव में डर और दहशत का माहौल है। महिलाएं खेतों में अकेले जाने से कतरा रही हैं, और बच्चों को भी घर से बाहर निकालना मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों की मांग—लगें पिंजरे, बढ़े निगरानी

गांववालों ने वन विभाग और प्रशासन से गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने, सीसीटीवी या गश्त जैसी निगरानी बढ़ाने, और गुलदार को पकड़कर सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष: बढ़ती चुनौती

यह घटना उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की एक और भयावह तस्वीर पेश करती है। लगातार बढ़ते हमलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? और कब तक ग्रामीण इस डर के साए में जीते रहेंगे?

सरकारी प्रतिक्रिया का इंतज़ार

फिलहाल, स्थानीय प्रशासन या वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन ग्रामीणों की मांगें और चिंता अब किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं की जा सकतीं। रुद्रप्रयाग के डागी गांव में हुआ यह हमला सिर्फ एक वृद्धा पर नहीं, बल्कि एक पूरे गांव की सुरक्षा और भरोसे पर हमला है। सरकार और प्रशासन को अब फौरन सतर्कता और कार्रवाई दिखाने की ज़रूरत है, ताकि जानवरों और इंसानों के बीच यह संघर्ष और भयावह न हो जाए।

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