नई दिल्ली: भारतीय सेना द्वारा मई 2025 में अंजाम दिए गए “ऑपरेशन सिंदूर” ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को हिलाकर रख दिया था। लेकिन अब खुफिया एजेंसियों से आई ताज़ा रिपोर्ट ने एक बार फिर से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी ISI ने फिर से आतंकी शिविरों को जिंदा करने की कोशिशें तेज कर दी हैं — वो भी पहले से ज्यादा हाई-टेक और रणनीतिक अंदाज़ में।
ISI की गोपनीय मीटिंग में फिर जहर बोया गया
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एक हालिया इंटरसेप्टिंग ऑपरेशन के जरिए बहावलपुर में हुई एक गोपनीय बैठक का पता लगाया है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन और TRF जैसे खतरनाक संगठनों के कमांडर और ISI अधिकारी शामिल थे। इस मीटिंग में ISI ने न केवल आतंकियों को फंडिंग का भरोसा दिलाया, बल्कि ह्यूमन रिसोर्स, तकनीकी सहायता और अत्याधुनिक निगरानी उपकरण देने की भी बात कही।
पुराने कैंप, नई तकनीक: आतंक की नई फैक्ट्री
ISI ने पुराने आतंकी अड्डों जैसे लूनी, चपराल, फॉरवर्ड कहता, और जंगलोरा को फिर से सक्रिय कर दिया है। लेकिन इस बार रणनीति बदली गई है। अब ये कैंप्स थर्मल इमेजर, एंटी-ड्रोन सिस्टम, लो-फ्रीक्वेंसी रडार, और सैटेलाइट-प्रूफ संरचनाओं से लैस किए जा रहे हैं। बड़े अड्डों की बजाय मिनी कैंप्स बनाए जा रहे हैं ताकि एक बार के हमले से अधिक नुकसान न हो।
POK और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर फिर हलचल
PoK के 13 प्रमुख लॉन्चिंग पैड्स – जैसे केल, शारदी, लीपा वैली, और चकोटी – में फिर से गतिविधियां शुरू हो गई हैं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मसरूर, चपराल, लूनी, और शकरगढ़ में ड्रोन लॉन्चिंग साइट्स को फिर से खड़ा किया जा रहा है। इन सभी जगहों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, जो शिविरों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलर्ट मोड
भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस नई गतिविधि पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। सेना और खुफिया इकाइयों को PoK और IB सेक्टर में निगरानी तेज करने के निर्देश दे दिए गए हैं। आने वाले दिनों में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति और आक्रामक हो सकती है।
विश्लेषण:
“ऑपरेशन सिंदूर” की सफलता के बाद पाकिस्तान द्वारा आतंक की नई चुपचाप बिछाई जा रही बिसात भारत के लिए एक बड़ा अलर्ट है। रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में नियंत्रण रेखा पर फिर से तनाव बढ़ सकता है।