देहरादून के स्पोर्ट्स कॉलेज में 8वीं के छात्र से रैगिंग का आरोप, अवसाद में गया छात्र, पिता ने कराया नाम वापस

 

 

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने न केवल कालेज प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि छात्र सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

चंपावत जनपद के टनकपुर निवासी आठवीं के एक छात्र के साथ रैगिंग के चलते मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि वह अवसाद में चला गया। हालात इतने बिगड़े कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और अंततः पिता ने उसका कालेज से नाम कटवा दिया।

एक साल से रैगिंग, छात्र ने बताई आपबीती

छात्र के पिता ने कालेज प्रबंधन को सौंपी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि पिछले एक साल से चार सीनियर छात्र उनके बेटे को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। छात्र ने बताया कि उससे बार-बार मारपीट की जाती थी और डराने-धमकाने का सिलसिला जारी रहता था। इससे वह बेहद डर गया और गुमसुम रहने लगा।

बीमार पड़ा छात्र, फिर उजागर हुआ मामला

छुट्टियों के बाद 15 जून को छात्र जब देहरादून लौट रहा था, तो बरेली में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। दोस्तों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां स्वजन भी पहुंचे। इलाज के बाद 22 जून को छात्र को वापस कॉलेज छोड़ा गया, लेकिन महज दो घंटे में ही फिर उसकी तबीयत बिगड़ गई।

अवसाद की पुष्टि, छात्र ने किया कॉलेज जाने से इनकार

रायपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर जिला अस्पताल में उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे अवसादग्रस्त बताया। जब पिता ने उससे खुलकर बात की, तो छात्र ने रैगिंग की पूरी कहानी साझा की। इसके बाद पिता ने तुरंत नाम वापसी की अर्जी दी और बेटे को घर ले गए।

कॉलेज प्रशासन ने कहा – मामले की होगी जांच

कॉलेज के प्रधानाचार्य राजेश ममगाईं ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में अभी नहीं आया है, लेकिन अगर शिकायत मिली है तो पूरी जांच की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि छात्र की तबीयत खराब होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद परिजन उसे घर ले गए।

पुनः चर्चा में आया स्पोर्ट्स कॉलेज, पहले भी उठ चुके हैं सवाल

गौरतलब है कि महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में पूर्व में भी छात्र उत्पीड़न के मामले सामने आ चुके हैं। यह घटना एक बार फिर से छात्र सुरक्षा, अनुशासन और रैगिंग विरोधी व्यवस्थाओं की स्थिति पर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है।

यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल पीड़ित छात्र और उसके परिवार के लिए एक गहरा आघात है, बल्कि समूचे शैक्षिक तंत्र के लिए चेतावनी भी है कि रैगिंग की जीरो टॉलरेंस नीति केवल कागज़ों तक सीमित न रह जाए।

 
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