तानाशाही के साए में संघर्ष की दास्तां: PM मोदी ने साझा की ‘द इमरजेंसी डायरीज’

 

 

 

नई दिल्ली: आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1975-77 के काले अध्याय से जुड़े अपने अनुभवों को साझा करते हुए एक विशेष पुस्तक ‘द इमरजेंसी डायरीज’ को सार्वजनिक किया है। इस पुस्तक में प्रधानमंत्री ने उस दौर की भयावहता, लोकतंत्र पर हुए हमले और अपने व्यक्तिगत संघर्षों की गहराई से झलक दी है।

PM मोदी ने X पर साझा किया अनुभव

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि वे उस समय एक युवा आरएसएस प्रचारक थे और आपातकाल के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन में सक्रिय रूप से भूमिगत रहते हुए शामिल थे। उन्होंने लिखा,

“आपातकाल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला अध्याय था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया और आम नागरिकों के अधिकारों को कुचल दिया गया।”

डिस्गाइज में यात्रा, भूमिगत आंदोलन और लोकतंत्र की सीख

‘द इमरजेंसी डायरीज’ में प्रधानमंत्री ने खुलासा किया है कि किस तरह वे विभिन्न वेशभूषाओं में छिपते-छिपाते एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचे और इंदिरा गांधी सरकार की नीतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक किया। इस दौरान उन्होंने कई राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों के साथ काम किया, जिससे उनका राजनीतिक दृष्टिकोण और भी व्यापक हुआ।

लोकतंत्र के लिए संघर्ष से प्रेरणा

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि यह दौर उनके लिए न केवल चुनौतीपूर्ण था, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को और गहरा करने वाला भी था। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास से सबक लें, लोकतंत्र के लिए सजग रहें और उसके संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं।

नई पीढ़ी के लिए चेतावनी और प्रेरणा

‘द इमरजेंसी डायरीज’ न केवल एक आत्मकथात्मक दस्तावेज है, बल्कि एक ऐतिहासिक चेतावनी भी है कि लोकतंत्र की रक्षा हमेशा सजग नागरिकों की जिम्मेदारी होती है। प्रधानमंत्री की यह पहल नई पीढ़ी को देश के संवैधानिक मूल्यों की अहमियत समझाने और सतर्क करने का संदेश देती है। प्रधानमंत्री मोदी की ‘द इमरजेंसी डायरीज’ सिर्फ किताब नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सच्चे लोकतंत्र की जिंदा दस्तावेज है, जो यह याद दिलाती है कि लोकतंत्र सिर्फ व्यवस्था नहीं, एक निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है।

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