डाकरा गुरुद्वारा में 20 किलोवाट सौर संयंत्र का उद्घाटन, मंत्री गणेश जोशी बोले “हरित प्रदेश बनेगा ऊर्जा आत्मनिर्भर

 

 

 

देहरादून: गढ़ी कैंट स्थित डाकरा गुरुद्वारा अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है। रविवार को यहां 20 किलोवाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने किया। लगभग 10 लाख रुपये की लागत से विधायक निधि के तहत स्थापित इस संयंत्र से प्रति दिन 100 यूनिट और प्रति माह करीब 3000 यूनिट बिजली का उत्पादन होगा।

हरित उत्तराखंड की दिशा में बड़ा कदम

मंत्री गणेश जोशी ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि “हरित उत्तराखंड” और “सौर स्वावलंबन” की ओर एक ठोस पहल है। उन्होंने बताया कि यह सौर संयंत्र गुरुद्वारे की सभी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा, जिससे न केवल बिजली बिल बचेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना को बताया गेमचेंजर

जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुआई में प्रदेश में चल रही सौर स्वरोजगार योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि इस योजना से पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का सपना साकार हो रहा है।

अन्य घोषणाएं और विकास कार्य

मंत्री ने इस मौके पर कैंट क्षेत्र के लिए कई अन्य विकास परियोजनाओं का भी ज़िक्र किया, जिनमें शामिल हैं:

  • सीवरेज योजना (58 करोड़ की लागत)

  • नलकूपों और वीरपुर पुल का निर्माण

  • टपकेश्वर मंदिर में भी सौर संयंत्र लगाने की घोषणा

  • गुरुद्वारा परिसर का सौंदर्यीकरण

श्रद्धा, तकनीक और विकास का संगम

कार्यक्रम की शुरुआत गुरुग्रंथ साहिब के दर्शन और आशीर्वाद से हुई। मंत्री जोशी को गुरुद्वारा प्रबंधन समिति द्वारा स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया।

कार्यक्रम का संचालन भाजपा नेता देवेंद्र पाल सिंह ने किया और उरेडा के अधिकारियों ने सौर परियोजना से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा की।

डाकरा गुरुद्वारा में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना न केवल एक धार्मिक स्थल की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करेगी, बल्कि राज्य के बाकी हिस्सों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल पेश करेगी।

उत्तराखंड अब केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि “ऊर्जावान उत्तराखंड” की पहचान भी गढ़ रहा है।

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