देहरादून: उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायतों के सामान्य निर्वाचन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि 12 जिलों में (हरिद्वार को छोड़कर) यह चुनाव दो चरणों में 10 जुलाई और 15 जुलाई को संपन्न होंगे, जबकि मतगणना 19 जुलाई 2025 को होगी।
निर्वाचन की प्रक्रिया की शुरुआत 25 जून से नामांकन के साथ होगी। चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है।
चरणबद्ध चुनाव कार्यक्रम
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नामांकन: 25 से 28 जून (सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक)
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नामांकन पत्रों की जांच: 29 जून से 1 जुलाई
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नाम वापसी की अंतिम तिथि: 2 जुलाई
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प्रतीक चिन्ह आवंटन: प्रथम चक्र – 3 जुलाई | द्वितीय चक्र – 8 जुलाई
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मतदान:
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पहला चक्र: 10 जुलाई
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दूसरा चक्र: 15 जुलाई
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मतगणना: 19 जुलाई से
66418 पदों पर होगा मतदान, 47.77 लाख मतदाता करेंगे मतदान
राज्य के 89 विकास खंडों में कुल 66,418 पदों (ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य) के लिए चुनाव होंगे। कुल 47,77,072 मतदाता मतदान करेंगे, जिनमें महिलाओं की संख्या 23.10 लाख और पुरुषों की संख्या 24.65 लाख है। यह 2019 की तुलना में 10.57% अधिक है।
8276 मतदान केंद्र, 10529 मतदान स्थल
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए 8276 मतदान केंद्र और 10529 मतदान स्थल निर्धारित किए हैं। चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए 95,909 कार्मिकों की तैनाती की जाएगी, जिनमें से 35,700 सुरक्षा कर्मी होंगे।
सख्त निगरानी: प्रेक्षक तैनात, नकदी-मदिरा पर कार्रवाई
निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए आयोग ने 55 सामान्य प्रेक्षक तैनात किए हैं और 12 अतिरिक्त प्रेक्षक आरक्षित रखे गए हैं। जिलों में व्यय प्रेक्षक, पुलिस और आबकारी विभाग की सर्विलांस टीमें गठित की गई हैं, जो अवैध नकदी, शराब या प्रलोभनों पर नजर रखेंगी।
उम्मीदवारों के लिए व्यय सीमा तय
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ग्राम पंचायत सदस्य: ₹10,000
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ग्राम प्रधान: ₹75,000
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क्षेत्र पंचायत सदस्य: ₹75,000
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जिला पंचायत सदस्य: ₹2,00,000
मतदाता सूची वेबसाइट पर उपलब्ध, टोल फ्री नंबर जारी
आयोग ने www.sec.uk.gov.in पर मतदाता सूची उपलब्ध कराई है। साथ ही शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-4280 भी जारी किया गया है।
उत्तराखंड में पंचायत चुनाव लोकतंत्र के जमीनी स्तर को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। दो चरणों में संपन्न होने वाले इन चुनावों के साथ राज्यभर में लोकतांत्रिक ऊर्जा का संचार होगा। आयोग ने पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरी तैयारियों के साथ चुनावी बिगुल फूंक दिया है।
