खाड़ी में जंग की आंच: अमेरिका–इजरायल बनाम ईरान संघर्ष से भारत पर कितना पड़ेगा असर?

 

 

 

TMP: मिडिल ईस्ट में तनाव अब खुली सैन्य टकराव की शक्ल ले चुका है। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त ऑपरेशन में ईरान पर मिसाइल हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। क्षेत्रीय संघर्ष के इस नए दौर का असर केवल युद्धरत देशों तक सीमित नहीं रहेगा—ऊर्जा और कमोडिटी बाजारों के जरिए इसकी लहरें भारत तक पहुंच सकती हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। रूस के बाद भारत की बड़ी खरीदारी इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और ओमान से होती है। इन देशों से आने वाला अधिकतर तेल Strait of Hormuz से होकर गुजरता है—एक ऐसा समुद्री मार्ग, जिस पर ईरान की रणनीतिक पकड़ मानी जाती है।

यदि हालात बिगड़ते हैं और इस जलडमरूमध्य की आवाजाही बाधित होती है, तो सप्लाई शॉक के चलते अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर भारत के आयात बिल और पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ेगा।

कच्चे तेल की मौजूदा कीमत और संभावित झटका

अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमत 2.78% बढ़कर 67.02 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। बाजार खुलने पर और तेजी की आशंका जताई जा रही है। अनुमान है कि तेल की कीमत में प्रति बैरल 1 डॉलर की वृद्धि से भारत पर सालाना लगभग 9,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2026 की अंतिम तिमाही तक कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। ऐसे में राजकोषीय घाटा बढ़ने, रुपये पर दबाव और महंगाई में तेजी की आशंका बढ़ेगी। माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी ऊपर जा सकती हैं।

पेट्रोल-डीजल पर असर कितना?

आज जब भारत 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कच्चा तेल खरीद रहा है, तब कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के करीब है। यदि कीमतें 90–100 डॉलर प्रति बैरल तक जाती हैं, तो खुदरा ईंधन दरों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता—जब तक सरकार टैक्स कटौती या सब्सिडी जैसे कदम न उठाए।

सोना–चांदी और अन्य धातुओं में उछाल

भू-राजनीतिक संकट के समय निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सोना और चांदी की कीमतों में भी तेजी देखी जा सकती है। शुक्रवार को गोल्ड की कीमत 1,61,971 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,74,389 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।

भारत सोने का बड़ा आयातक है। 2025 में देश ने 58.8 अरब डॉलर का सोना और 9.2 अरब डॉलर की चांदी आयात की। भारत सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से खरीदता है, जो कुल आयात का लगभग 40% हिस्सा है। कीमतों में उछाल से ज्वेलरी उद्योग और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

व्यापक आर्थिक असर

  • रुपये पर दबाव: आयात बिल बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ेगी, जिससे रुपये की विनिमय दर कमजोर हो सकती है।

  • राजकोषीय घाटा: सब्सिडी और आयात लागत बढ़ने से सरकार के वित्तीय संतुलन पर असर पड़ेगा।

  • महंगाई: ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर हर सेक्टर पर पड़ेगा।

आगे क्या?

संघर्ष की दिशा और अवधि तय करेगी कि असर कितना गहरा होगा। यदि तनाव सीमित दायरे में रहता है तो बाजार कुछ समय बाद स्थिर हो सकते हैं। लेकिन यदि जलडमरूमध्य की आपूर्ति बाधित होती है या बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा झटका संभव है।

मिडिल ईस्ट की यह जंग केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं—यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की परीक्षा बन सकती है, और भारत जैसे आयात-निर्भर देश इसके असर से अछूते नहीं रहेंगे।

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