कोटद्वार : उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में इंसाफ की लड़ाई ने आज बड़ी जीत हासिल की। कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे) ने आज मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, और उसके साथी सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता को हत्या, साक्ष्य मिटाने और छेड़छाड़ के अपराधों में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
आरोपियों पर ये धाराएं लागू
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धारा 302 (हत्या)
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धारा 201 (साक्ष्य छिपाना)
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धारा 354 (महिला के साथ अश्लील व्यवहार)
सजा के साथ-साथ कोर्ट ने तीनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही, अंकिता के परिजनों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि देने का आदेश भी अदालत ने सुनाया।
न्याय की प्रतीक्षा में सुलगता जनाक्रोश
अदालती फैसले के दिन कोर्ट परिसर के बाहर भारी संख्या में लोग जुटे, जिनके चेहरों पर न्याय की उम्मीद और गुस्से की तीव्रता दोनों साफ झलक रही थी। फैसले से ठीक पहले भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़कर न्यायालय परिसर में घुसने की कोशिश की, जिसे रोकने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
मामले की पृष्ठभूमि
2022 में अंकिता भंडारी, जो यमकेश्वर के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थी, 18 सितंबर को लापता हुई थीं। 28 सितंबर को उसकी हत्या की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि अंकिता के साथ अन्याय और अमानवीय व्यवहार किया गया, जिसका विरोध करने पर उसकी निर्दयता से हत्या कर दी गई थी।
यह मामला राज्यभर में जनाक्रोश और प्रदर्शन की लहर का कारण बना, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी थी।
अब इंसाफ की पहली किरण
कोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक सजा नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि न्याय भले देर से मिले, पर जब आता है तो सच्चाई की जीत तय करता है।
अंकिता को खोने का दर्द शायद कभी न मिटे, लेकिन आज का दिन उसके परिजनों और पूरे राज्य के लिए राहत का दिन है।
