करीब 47.59 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला बिनसर वन्यजीव अभयारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने ओक और देवदार के जंगलों तथा हिमालय के अद्भुत दृश्यों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। अब वन विभाग यहां आधुनिक कैमरा ट्रैप तकनीक के जरिए वन्यजीवों की निगरानी करेगा।
50 ग्रिड में बांटा गया पूरा जंगल
वन्यजीव गणना को व्यवस्थित और वैज्ञानिक बनाने के लिए पूरे अभयारण्य क्षेत्र को 50 ग्रिड में विभाजित किया गया है। इन ग्रिडों के आधार पर जंगल के अलग-अलग हिस्सों में 100 से अधिक कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे।
इन कैमरों के जरिए वन्यजीवों की आवाजाही, उनके व्यवहार और निवास क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाएगी। कैमरों से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जाएगा कि अभयारण्य में किस प्रजाति की कितनी संख्या मौजूद है और उनकी गतिविधियां किन क्षेत्रों में अधिक हैं।
विशेषज्ञों की निगरानी में होगा अध्ययन
वन विभाग की छह सदस्यीय टीम के साथ वरिष्ठ वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम भी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी। विशेषज्ञ कैमरा ट्रैप से प्राप्त डाटा का वैज्ञानिक विश्लेषण कर वन्यजीव संरक्षण के लिए नई रणनीति तैयार करेंगे।
वन अधिकारियों का मानना है कि यह पहल बिनसर के पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर ढंग से समझने और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने में अहम साबित होगी।
लोमड़ी की मौजूदगी पर भी रहेगा फोकस
इस वन्यजीव गणना का एक महत्वपूर्ण पहलू लोमड़ी की मौजूदगी और उसकी संख्या का पता लगाना भी है। विभाग को उम्मीद है कि इससे इस प्रजाति के संरक्षण के लिए प्रभावी योजना तैयार करने में मदद मिलेगी।
डीएफओ सिविल सोयम अल्मोड़ा प्रदीप धौलाखंडी ने बताया कि बिनसर वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीव गणना की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से अभयारण्य में मौजूद वन्यजीवों की सटीक संख्या का पता लगाया जा सकेगा, जो भविष्य की संरक्षण योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।