रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव: अब निजी कंपनियां भी बनाएंगी भारत की अत्याधुनिक मिसाइलें

 

 

 

नई दिल्ली: भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सेना की बढ़ती जरूरतों को तेजी से पूरा करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने रणनीतिक मिसाइल निर्माण क्षेत्र में निजी भारतीय कंपनियों की भागीदारी का रास्ता खोलने का फैसला किया है। अब तक यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) निभा रही थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय जल्द ही स्वदेशी ‘अस्त्र मार्क-2’ बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल के उत्पादन के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित करेगा। इसके बाद डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘प्रलय’ टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल के निर्माण में भी निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

बढ़ती मांग के चलते लिया गया फैसला

भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के साथ-साथ मित्र देशों से भारतीय मिसाइलों की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहती है। हाल ही में इंडोनेशिया ने भारत से अस्त्र मार्क-1 मिसाइल खरीदने का समझौता किया है, जबकि कई अन्य देश भी भारतीय रक्षा प्रणालियों में रुचि दिखा रहे हैं।

अस्त्र और प्रलय क्यों हैं खास?

अस्त्र मार्क-2 लंबी दूरी तक हवा में दुश्मन के लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने में सक्षम है। इसे तेजस, मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है और इसे चीन की PL-15E मिसाइल का मजबूत जवाब माना जा रहा है।

वहीं प्रलय दो-चरणीय क्वासी बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता करीब 500 किलोमीटर है। यह ध्वनि की गति से कई गुना अधिक रफ्तार से लक्ष्य को भेद सकती है और भविष्य में भारतीय सेना की रॉकेट फोर्स का अहम हिस्सा बनने जा रही है।

एयर डिफेंस भी होगा और मजबूत

सरकार केवल मिसाइल उत्पादन ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि देश के लिए मल्टी-लेयर एंटी-मिसाइल और एंटी-ड्रोन सुरक्षा नेटवर्क विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके तहत भविष्य में इंटरसेप्टर मिसाइलों और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम के निर्माण में भी निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ाई जा सकती है।

इस पहल का उद्देश्य भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को आत्मनिर्भर बनाना, निर्यात बढ़ाना और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में सेना को अत्याधुनिक हथियार समय पर उपलब्ध कराना है।

 
 
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